अखबार की शक्ति
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बच्चों और युवाओं के बीच सोशल मीडिया और स्क्रीन टाइम बढ़ने के दौर में कर्नाटक सरकार का हाल ही का एक निर्देश बहुत मायने रखता है। इस निर्देश में सरकार ने स्कूलों में दिन की शुरुआत अखबार पढ़ने से करने को कहा है। इसके कई लाभ हो सकते हैं –
- पढ़ने से दिमाग तेज होता है।
- समझने की क्षमता तेज होती है।
- याददाश्त मजबूत होती है।
- युवा दिमाग गहरी और वैचारिक सोच की ओर मुड़ता है।
- भाषा में प्रवीणता आती है, जागरुकता बढ़ती है, और ध्यान को स्थिर करने में मदद मिलती है।
- इससे युवा और बच्चे उन घटनाओं, विचारों और वास्तविकताओं से रूबरू हो पाते हैं, जो उनके जीवन को आकार देती हैं।
- सोशल मीडिया पर होने वाली अंतहीन स्क्रॉलिंग से अखबारों की एक्टिव रीडिंग कई गुना बेहतर है। यह बच्चों को यह नहीं सिखाते कि क्या सोचना है, बल्कि कैसे सोचना भी सिखाते हैं। इससे उनका विकास बेहतर होता है।
सरकारी नीति सिर्फ एक शुरुआत कर सकती है। इसे आदत बनाना समाज और परिवार का भी काम है। इस कोशिश को जड़ जमाने के लिए शिक्षकों और अभिभावकों का सहयोग चाहिए।
(‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ में प्रकाशित 27/04/2026 के संपादकीय पर आधारित)