सुरक्षित सोशल मीडिया के लिए UNHRC के दिशा-निर्देशों की आवश्‍यकता

Afeias
26 Jun 2026
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संयुक्‍त राष्‍ट्र मानवाधिकार आयोग ने ‘बच्‍चों की आनलाइन सुरक्षा सनिश्चित करना’ नाम से मार्गदर्शिका जारी की है, ताकि ऑनलाइन प्‍लेटफार्मों को किशारों के लिए रक्षित बनाया जा सके।

इन दिशा-निर्देशों की आवश्‍यकता क्‍यों?

  • दिसंबर 2025 में आस्‍ट्रेलिया ने 16 साल से कम उम्र के बच्‍चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगा दिया। इसके बाद यूनान, फ्रांस, स्‍पेन, डेनमार्क, इंडोनेशिया व मलेशिया ने भी कुछ ऐसे ही कदम उठाए। ब्रिटेन में भी इसकी संभावना है। पर ऐसे प्रतिबंधों से बच्‍चे अवैध प्‍लेटफार्म; जैसे डार्कनेट की ओर बढ़ते हैं। इसीलिए संयुक्‍त राष्‍ट्र मानवाधिकार आयोग प्‍लेटफार्म के डिजाइन और संचालन प्रक्रिया बदलने की बात कर रहा है।
  • भारत में भी 40 करोड़ बच्‍चे इंटरनेट का प्रयोग कर रहे हैं। 9 से 17 वर्ष के मध्‍य के बच्‍चे समय गुजारने के लिए फेसबुक, इंस्‍टाग्राम या यूट्यूब का प्रयोग कर रहे हैं। कर्नाटक, आंध्रप्रदेश और गोवा में भी 16 वर्ष से कम उम्र के बच्‍चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध की बात की जा रही है।
  • सोशल मीडिया के अत्‍यधिक प्रयोग से बच्‍चे भावनात्‍मक रूप से कमजोर होते हैं तथा उनकी सोचने-समझने की क्षमता भी प्रभावित होती है।
  • राष्‍ट्रीय मानवाधिकार आयोग भी बच्चों के साइबर बुलिंग और ऑनलाइन शोषण से जुड़ी सामग्रियों के संपर्क में आने के प्रति अपनी चिंताएं व्यक्त कर चुका है।
  • ऑनलाइन शिक्षा के बढ़ते चलन के कारण बच्‍चों को ऑनलाइन प्‍लेटफार्म से दूर नहीं किया जा सकता।

इसके निराकरण के लिए ‘आटोप्‍ले’ या अनियमित ‘स्‍क्रालिंग’ पर पाबंदी लगाने या सोशल मीडिया के रोजाना प्रयोग की सीमाऍं तय कर मध्‍यमार्ग अपनाया जा सकता है।

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