लोकप्रियता के बावजूद फुटबॉल पीछे क्यों
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हाल ही में होने वाले फीफा वर्ल्ड कप फुटबाल टूर्नामेंट के मद्देनजर एक प्रश्न सहज ही उठ खड़ा होता है। भारत में इसके करोड़ों प्रशंसक हैं, लेकिन वह मैदान पर आज तक अपनी जगह क्यों नहीं बना पाया?
कुछ तथ्य –
- केपीएमजी की 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, देश में करीब 30 करोड़ फुटबाल दर्शक हैं।
- यह भारत का दूसरा सबसे ज्यादा देखा जाने वाला खेल है।
- फिर भी उसकी घरेलू प्रमुख प्रतियोगिता इंडियन सुपर लीग अनिश्चितता से जूछ रही है। इस लीग के बाजार-मूल्य में गत वर्ष में 182.8 करोड़ रुपये की गिरावट आई है।
- 2018 से 2025 के बीच इसके दर्शकों की संख्या में 25% की वृद्धि हुई है। इसके बावजूद घरेलू लीग की लोकप्रियता नहीं बढ़ सकी है।
- भारतीय फुटबॉल टीम की सर्वश्रेष्ठ फीफा रैंकिंग 1996 में 94 थी। यह अब 138 है। भारत के लिए शीर्ष 50 में जगह बनाना एक बहुत बड़ी चुनौती बनी हुई है।
भारतीय फुटबॉल की चुनौतियां –
- घरेलू लीगों में स्थिरता की कमी।
- क्लब एवं जमीनी ढांचे में सीमित निवेश।
- प्रतिभा विकास की कमजोर व्यवस्था।
- दर्शकों की पसंद विदेशी लीग।
- क्रिकेट के मुकाबले प्रायोजकों और मीडिया का समर्थन कम।
(‘हिन्दुस्तान’ में प्रकाशित लेख पर आधारित- 1/06/2026)