सोशल मीडिया कंपनियों को दंड
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मार्च 2026 में कैलीफोर्निया (अमेरिका) की एक जूरी ने मेटा और यूट्यूब को एक मामले में दोषी करार दिया है। यह मामला के.जी.एम. नामक एक किशोरी के मानिसक स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ है। मामले की सुनवाई में कहा गया है कि इन सोशल मीडिया मंचों पर की जाने वाली लगातार स्क्रोलिंग, एल्गोरिदम से दिए जाने वाले सुझाव और ऑटोप्ले जैसे तत्वों का इसतेमाल जानबूझकर लत को बढ़ावा देने के लिए किया जाता है। यह बच्चों के विकास में घातक सिद्ध हो रहा है।
कुछ बिंदु –
मामले का मुख्य बिंदु – दोनों कंपनियों ने माना कि उन्होंने जानबूझकर व्यसनकारी तरीके डिजाइन किए थे।
परिणाम – जूरी ने दोनों मंचों को लापरवाही का दोषी पाया है। के.जी.एम. को पर्याप्त हर्जाना दिया गया।
व्यापक प्रभाव – यह मामला एक ऐतिहासिक निर्णय की तरह काम करता है। ऐसे हजारों लंबित मुकदमों को इस निर्णय से एक दिशा मिलेगी। साथ ही बड़ी तकनीकी कंपनियों को बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए काम करने की चेतावनी मिलती है। मेटा और गूगल ने तर्क दिया है कि वे बच्चों को सोशल मीडिया से दूर रखने के लिए इंटरनल सिस्टम को दुरूस्त करने पर काम कर रहे हैं।
उपभोक्ता की जिम्मेदारी – तकनीक के उपभोक्ता सोशल मीडिया की तल का पूरा बोझ मंचों पर नहीं डाल सकते। टीवी के प्रसार के साथ ही इसकी लत की समस्या भी जन्मी थी, लेकिन माता-पिता ने इसे सफलतापूर्वक नियंत्रित किया है। बच्चों और किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य का संबंध अन्य कारणों से भी जुड़ा हुआ है। अतः उन्हें सुलझाने के लिए सेाशल मीडिया पर रोक लगाना पूरा समाधान नहीं है।
समाचार पत्रों पर आधारित। 27/28 मार्च, 2026