परिसीमन और महिलाओं के लिए कोटा जनगणना से जुड़े दो मुख्य मुद्दे

Afeias
22 Apr 2026
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हाल ही में संपन्न हुई संसद की बैठक में सरकार के दो मुख्य लक्ष्य रहे हैं। इनमें (1) परिसीमन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना है। इससे लोकसभा में प्रतिनिधियां की संख्या तय होती है।

कुछ बिंदु –

  • परिसीमन का अर्थ जनसंख्या परिवर्तन के आधार पर समान प्रतिनिधितत्व सुनिश्चित करने के लिए लोकसभा और विधानसभाओं के लिए प्रत्येक राज्य में सीटों की संख्या, और क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाएं तय करना है।
  • इसमें आरक्षित सीटों का निर्धारण भी शमिल होता है।
  • इस प्रक्रिया के लिए परिसीमन आयोग बनाया गया है।
  • इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक मतदाता के वोट का समान मूल्य हो यानि ‘एक व्यक्ति, एक वोट’।
  • अनुच्छेद 82 के तहत, संसद प्रत्येक जनगणना के बाद परिसीमन पारित करती है। 2002 के 84वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम ने 2026 के बाद होने वाली पहली जनगणना तक कुल सीटों की संख्या, और क्षेत्रीय सीमाओं को स्थिर कर दिया है।

(2) संसद का दूसरा लक्ष्य 2029 तक महिलाओं के 33%  कोटे को लागू करने के लिए कानूों में बदलाव करना है।

कुछ बिंदु –

  • महिला कोटा का कानून जब पारित हुआ था, तो इसे 2021, और अब 2027 की जनगणना के बाद के परिसीमन से जोड़ा गया था।
  • महिलाओं के कोटे का उद्देश्य संसाधनों को बराबरी से साझा करने से है। अगर सरकार महिला सशक्त्किरण वाकई करना चाहती है, तो 543 सीटों वाली लोकसभा, और विधानसभाओं में कोटा तुरंत लागू कर दिया जाना चाहिए।

दोनों उद्देश्यों की चुनौतियां –

  • जिन राज्यों (मुख्यतः दक्षिण) की आबादी स्थिर हो गई है। उनके लिए 2027 को परिसीमन का आधार बनाने से लोकसभा की सीटें कम हो जाएंगी। यदि 2011 के आधार पर बांटा जाए, तो संसद की सीटें 816 हो जाएंगी।
  • परिसीमन के साथ महिला कोटा लागू करने से ऐसे राज्यों को दोहरी मार पड़ेगी।
  • परिसीमन को जनगणना से अलग करने से, बढ़ी हुई आबादी का सही राजनीतिक प्रतिनिपधित्व नहीं हो सकता है।
  • 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन करने से पिछले 15 वर्षों में हुए शहरी फैलाव और प्रवास नजर- अंदाज हो जाते हैं।

चिंता इस बात की है कि ये दोनों कदम 2027 की जनगणना को लागू करने को लेकर सरकार की अनिश्चितता का संकेत दे रहे हैं।

विदेशों के उदाहरण –

  • अमेरिका के हाउस ऑफ रिप्रेसन्टेटिवस में 1913 से सीटों की संख्या 435 रखी गई है, जबकि तब से लेकर अब तक जनसंख्या लगभग चार गुना बढ़ चुकी है।
  • यूरोपियन यूनियन की संसद में 720 सदस्य हैं। इन सीटों को 27 सदस्य देशों के बीच ‘अवक्रमण आनुपातिका‘ के सिद्धांत के आधार पर विभाजित किया गया है।

कुल मिलाकर, लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व के लिए संतुलन बनाना बहुत जरूरी है।

‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ में प्रकाशित संपादकीय पर आधारित। 25 मार्च 2026