परीक्षाओं के लिए नई प्रणाली की व्यवस्था की आवश्यकता

Afeias
08 Aug 2026
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राष्‍ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने 12 मई को नीट-यूजी की परीक्षा को पेपरलीक के कारण रद्द कर दिया, जबकि इसमें 22.7 लाख अभ्‍यर्थी शामिल हुए थे। दुबारा यह परीक्षा बिना व्‍यवधानों के सम्‍पन्‍न हुई।। लेकिन इससे ईमानदार छात्र ही दंडित होते हैं।

परीक्षा लीक होने के कारण –

  • परीक्षाऍं ऐसे तंत्र से आयोजित हो रही है, जिसे वर्तमान समय के पैमाने, जटिलता और प्रोत्‍साहनों के अनुरूप अभी तक अपडेट नहीं किया गया है।
  • एनटीए ने 2018 से 2023 के बीच परीक्षाऍं आयोजित कीं। इस अवधि में अभ्‍यर्थियों की संख्‍या 67 लाख से 122 लाख हो गई। 2024 में चीन की गाओकाओ परीक्षा में 134.2 लाख अभ्‍यर्थी तथा दक्षिण कोरिया की सीएसएटी परीक्षा में 2026 में 5.54 लाख आवेदक थे। लेकिन भारत में इन दो देशों के विपरीत एक वर्ष में कई परीक्षाऍं आयोजित होती हैं।। ये परीक्षाऍं लगातार चलने वाली, संघीय बहुभाषी और व्‍यापक है।
  • चीन और कोरिया में परीक्षा में पूरे राज्‍य की मशीनरी लगी होती है। पर यदि हम भारत में ऐसा करें, तो ऐसा बहुत बार करना पड़ेगा। इसीलिए हमें मजबूत, माडड्यूलर, तकनीक-समर्थित, संचालन में विकेंद्रीकृत, लेकिन मानकों में केन्‍द्रीकृत व्‍यवस्‍था चाहिए।

आइए 2024 में राष्‍ट्रीय परीक्षाओं में विवादों के बाद गठित डॉ.राधाकृष्‍णन की अध्‍यक्षता में उच्‍च स्‍तरीयसमिति के पारदर्शी, सुचारू और निष्‍पक्ष संचालन के लिए बताए गए उपायों को देखें –

  • भारत को एनटीए का पुननिर्माण एक स्‍थायी पेशेवर और मिशन आधारित मूल्‍यांकन संस्‍था के रूप में करना होगा। इसमें साइकोमेट्रिक्‍स, साइबर सुरक्षा, लाजिस्टिक्‍स, डेटा विश्‍लेषण, पेपर सेटिंग, वेंडर प्रबंधन और कानून प्रवर्तन जैसे क्षेत्रों में गहरी आंतरिक क्षमता हो।
  • सबसे सुरक्षित पपर वह होता है, जिसे कोई पूरी तरह देख ही न पाए, जैसा यूपीएससी और जेईई में होता है। बड़े व गुमनाम पैनल, अलग-अलग स्‍तरों में विभाजित व्‍यवस्‍था, कई समानांतर पेपर सेट, रैडमाइजेशन और प्राइवेट इंटरमीडियरीज के लिए न्‍यूनतम पहुँच हो
  • तकनीक को व्‍यवस्‍था के अनुरूप काम करना चाहिए। भविष्‍य बड़े और लगातार अपडेट किए जाने वाले प्रश्‍न बैंक, कंप्‍यूटर आधारित परीक्षाओं और समय के साथ एडाटिव टेस्टिंग में है। हमें डिजिटल परीक्षा ढांचा भी तैयार करना चाहिए।
  • राधाकृष्‍णन समिति के 1000 केन्‍द्रीय विद्यालयों और अन्‍य विश्‍वसनीय सार्वजनिक संस्‍थाओं को सुरक्षित परीक्षा केन्‍द्र के रूप में विकसित करने के प्रस्‍ताव को लागू करना चाहिए।
  • पहचान और निगरानी व्‍यवस्‍था मजबूत हो। एआई का उपयोग भी फारेंसिक उपकरण के रूप में किया जा सकता है।

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