ऑनलाइन सेंसरशिप की ओर बढ़ती सरकार
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केन्द्र सरकार ने आईटी नियम, 2021 में कुछ बदलाव किए हैं। ये बदलाव सरकार के अपने हित में किए गए हैं। सरकार ने ऑनलाइन मंचों, विशेष कर मेटा और X को तीन घंटे की समय सीमा के अंदर आपत्तिजनक कंटेंट हटाने का निर्देश दिया है। स्पष्ट है कि सरकार अपने विरूद्ध प्रकाशित सामग्री को सेंसर करने का दबाव बना रही है।
एआई से बने कंटेंट पर शिकंजा कसने की आड़ में सरकार तानाशाही कर रही है। इस कदम से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मूल्य घट जाता है। इंटरनेट एक ऐसा माध्यम बन गया है, जिसमें हर श्रेणी का वयस्क अपनी आवाज उठा सकता है। ये स्वतंत्र आवाजें, तीखी आलोचना और स्वतंत्र आदर्श, किसी भी लोकतांत्रिक समाज का जरूरी हिस्सा है।
सरकार ने आई टी कानून, 2000 के सेक्शन 69ए और 79(3)(बी) का इस्तेमाल करके मंचों पर दबाव बनाया है। देश भर के पुलिस अधिकारियों के लिए तथाकथित सहयोग पोर्टल खोला गया है। इस पोर्टल में सेक्शन 79(3)(बी) के तहत आने वाले अनुरोधों को सेंसर करने के लिए पुलिस को अतिरिक्त शक्ति दे दी गई है। आई टी कानून ऐसी कोई अनुमति नहीं देता है।
फिलहाल, सरकार ने संसद में कानून पारित करके अपनी इन शक्तियों को औपचारिक बनाने पर कोई कदम नहीं उठाया है। दूसरी ओर, सोशल मीडिया मंच सरकार से उलझने से कतरा रहे हैं। उन्होंने सरकार निर्देशित टेकडाउन नोटिस को ऑटोमैटिक प्रोसेस करना स्वीकार कर लिया है। दुखद यह भी है कि विपक्षी दल इसका विरोध करने के बजाय अपने द्वारा शासित राज्यों में सहयोग पोर्टल का जमकर लाभ उठा रहा है।
(‘द हिन्दू’ में प्रकाशित 04/05/2026 के संपादकीय पर आधारित)