गुणवत्ता नियंत्रण से सशक्त होगा कृषि निर्यात
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भारत को कृषि निर्यात में वैश्विक स्तर पर विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता बनने के लिए केवल उत्पादन बढ़ाने पर नहीं, बल्कि खाद्य सुरक्षा, गुणवत्ता नियंत्रण और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुपालन पर भी समान रूप से ध्यान देना होगा।
पृष्ठभूमि –
हाल के महीनों में भारतीय कृषि उत्पादों को कई देशों में गुणवत्ता संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ा —
- जापान ने भारतीय आम की कुछ खेप अस्वीकार कर दी।
- यूरोपीय संघ में भारतीय जड़ी-बूटियों, मसालों और मेवों में अधिक कीटनाशक अवशेष पाए गए।
- ऑस्ट्रेलिया ने लगभग ₹200 करोड़ मूल्य के बासमती चावल की खेप को फ्यूमिगेशन मानकों का पालन न करने के कारण बंदरगाहों पर रोक दिया।
हालाँकि ऑस्ट्रेलिया ने स्पष्ट किया कि भारतीय बासमती पर कोई प्रतिबंध नहीं है और चावल की सुरक्षा पर भी प्रश्न नहीं है, लेकिन 44 भारतीय फ्यूमिगेशन सेवा प्रदाताओं को निलंबित किया गया।
मुख्य समस्याएँ –
- गुणवत्ता नियंत्रण की कमजोरी
- कई कृषि उत्पादों में अनुमेय सीमा से अधिक कीटनाशक अवशेष और भारी धातुएँ पाई गईं। इससे भारतीय उत्पादों की वैश्विक छवि प्रभावित होती है।
- आपूर्ति श्रृंखला में ट्रेसबिलिटी की कमी
- खेत से बंदरगाह तक उत्पाद की निगरानी पर्याप्त नहीं है।
- इसके चलते किसी समस्या की स्थिति में उसके स्रोत की पहचान करना कठिन हो जाता है।
- हानिकारक रसायनों का उपयोग
- भारत में अभी भी पैराक्वाट और 2,4-डी एमाइन सॉल्ट जैसे कई ऐसे रसायनों का उपयोग होता है, जिन पर अनेक देशों में प्रतिबंध या कड़े प्रतिबंध हैं।
- अनधिकृत फल पकाने वाले रसायनों का भी उपयोग किया जाता है।
- परीक्षण एवं अनुपालन तंत्र कमजोर
- निर्यात से पहले पर्याप्त गुणवत्ता परीक्षण नहीं होते।
- छोटे किसानों और निर्यातकों में जागरूकता तथा निगरानी की कमी है।
सुधार के उपाय –
- विज्ञान-आधारित खाद्य सुरक्षा मानक
अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप नियम बनाए जाएँ।
- खेतों से बंदरगाह तक निगरानी तंत्र
डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से खेत से निर्यात तक प्रत्येक चरण का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाए।
- कठोर परीक्षण एवं प्रमाणन
- निर्यात से पहले प्रत्येक खेप का आधुनिक प्रयोगशालाओं में परीक्षण किया जाए।
- फ्यूमिगेशन और गुणवत्ता प्रमाणन प्रणाली को मजबूत बनाया जाए।
- खतरनाक कीटनाशकों का चरणबद्ध निष्कासन
- अनधिकृत रसायनों के विकल्प उपलब्ध कराकर उनका उपयोग समाप्त किया जाए।
- जैविक एवं एकीकृत कीट प्रबंधन को बढ़ावा दिया जाए।
- किसानों का प्रशिक्षण
सुरक्षित कीटनाशक उपयोग, उचित मात्रा, अवशेष नियंत्रण तथा गुणवत्ता मानकों पर प्रशिक्षण दिया जाए।
क्या लाभ हो सकते हैं –
- कृषि निर्यात में वृद्धि होगी।
- भारतीय उत्पादों की वैश्विक विश्वसनीयता बढ़ेगी।
- किसानों को बेहतर कीमत मिलेगी।
- उपभोक्ताओं का स्वास्थ्य सुरक्षित रहेगा।
- मिट्टी और जल प्रदूषण कम होगा।
- भारत विश्वसनीय खाद्य आपूर्तिकर्ता के रूप में अपनी पहचान मजबूत करेगा, तथा
- घरेलू उपभोक्ताओं का स्वास्थ्य भी सुधरेगा।
भारत यदि वैश्विक कृषि व्यापार में दीर्घकालिक नेतृत्व चाहता है, तो गुणवत्ता, खाद्य सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन उसकी प्रतिस्पर्धात्मक शक्ति बनना चाहिए।
केवल अधिक उत्पादन पर्याप्त नहीं है। सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण और ट्रेस करने योग्य कृषि उत्पाद ही भारत को वैश्विक बाज़ारों में स्थायी सफलता दिला सकते हैं।
‘द इकोनॉमिक टाइम्स‘ में प्रकाशित संपादकीय पर आधारित। (15/07/26)