राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (6) पर महत्वपूर्ण बिन्दु
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- 2023-24 के डेटा से पता चलता है कि देश ने कुछ क्षेत्रों में (विशेषकर बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़े) काफी सुधार किया है। पहले से स्टंटिंग या कद छोटा रहना 17% कम हुआ है। वेस्टिंग या बहुत अधिक कमजोरी के मामले 32% कम हुए हैं। संस्थागत या अस्पतालों में प्रसव 90% से ज्यादा हो गया है। 12-23 माह के बच्चों का पूरा टीकाकरण कवरेज 87% से ज्यादा हो गया है।
- भारत की कुल प्रजनन दर 2.1 के प्रतिस्थापन स्तर से नीचे 2.0 पर स्थिर हो गई है।
- दूसरी ओर यह सर्वे एक दोहरे सार्वजनिक स्वास्थ्य बोझ का संकेत देता है। तीन वर्षों में मोटापा काफी बढ़ गया है। पुरुषों में 22.9% से बढ़कर 27.3% हो गया, जबकि महिलाओं में 24% से बढ़कर 30.7% हो गया है।
- छ महीने से कम उम्र के बच्चों को स्तनपान कराने में कमी आई है। यह सर्वेक्षण-5 में 63.7% था, जो घटकर 55.8% हो गया है। बच्चों में कुपोषण को रोकने के लिए स्तनपान जरूरी है।
सर्वेक्षण का इतना महत्व क्यों है –
- यह दुनिया के बड़े अंतर-विभागीय घरेलू सर्वे में से एक है। इसे विकास-सूचकांक को मापने के अलावा, सार्वजनिक नीतियों और सबूतों पर आधारित प्रशासन को दिखाने का प्रमुख साधन माना जा सकता है।
- अन्य राष्ट्रीय स्तर के डेटा भी लगभग ऐसा ही चलन दिखाते हैं।। जीवन शैली से जुड़ी बीमारियों और पाचन तंत्र की समस्याओं पर ध्यान और निधि की कमी है।
- गैर-संक्रामक रोगों के लिए बड़े स्क्रीनिंग प्रोग्राम बनाना, पूरे देश में आहार और व्यायाम के प्रति जागरुकता फैलाना, चीनी वाले पेय पदार्थ और पैकेट वाले खाद्य पदार्थों पर अधिक कर लगाने से कुछ राहत मिल सकती है।
(‘द हिन्दू’ में 02/06/2026 को प्रकाशित संपादकीय पर आधारित)