जंगल की बढ़ती आग
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भारत में जंगल की आग के मामले बढ़ते ही जा रहे हैं। भारतीय शहरों में दिन का तापमान दुनिया के सबसे गर्म 95 शहरों जैसा ही चल रहा है। पहाड़ी शहर भी बहुत गर्म हो रहे हैं। उत्तराखंड और तमिलनाडु में जंगल की आग ने सबसे ज्यादा तबाही मचा रखी है। इससे जुड़े कुछ तथ्य –
- सैटेलाइट इमेज से पता चलता है कि भारत के जंगलों में 13,771 जगहों पर आग लगी हुई है। यह पिछली 15 गर्मी के मौसम में लगने वाली आग के औसत से ज्यादा है।
- दुनिया भर में, जंगल की आग की कुल अवधि बढ़ती जा रही है। इसके तीन मुख्य कारण हैं – पहला, बढ़ता तापमान (खासकर रात का) दूसरा, कम बारिश। तीसरा, बर्फ का जल्दी पिघलना।
- भारत में बर्फ वाला कारक सिर्फ उत्तरी पहाड़ों पर लागू होता है। लेकिन बाकी दो पूरे देश में महसूस किए जाते हैं।
- अध्ययनों से पता चलता है कि जंगल की आग अब 20 साल पहले के मुकाबले दोगुने पेड़ जला देती हैं। ये वातावरण में और भी ज्यादा कार्बन डाइऑक्साइड मिला देती है। इससे धरती और भी ज्यादा गर्म हो जाती है। यह एक पूरा घातक चक्र है। जीवाश्म ईंधन के जलने से हर साल 37 अरब टन सीओटू निकलती है। जंगल की आग से 8 अरब टन या 20% सीओटू निकलती है। पेड़ों के खत्म होने से सीओटू सिंक की क्षमता कम हो जाती है। दुनिया में 135 करोड़ हेक्टेयर जंगल 2024 तक खत्म हो चुके हैं। यह ग्रीस के कुल क्षेत्र से भी ज्यादा है।
कुछ समाधान –
- जंगलों को बचाने के लिए ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को तेजी से कम करने की जरुरत है। इसका मतलब जीवाश्म ईंधन का उपयोग कम करना।
- भारत की ऊर्जा मांग में एसी का हिस्सा लगभग 7% है। जबकि 10% से भी कम भारतीय इसका उपयोग करते हैं। क्या होगा जब दुनिया की सबसे बड़ी आबादी में कार और एसी की खरीदारी बढ़ जाएगी।
- इसका हल विकार्बनीकरण में ढूंढा जा रहा है। सौर ऊर्जा और इलेक्ट्रिक कारों का उपयोग बढ़ाया जाना चाहिए। फिलहाल हम 22% सौर ऊर्जा से ऊर्जा मांग को पूरा कर रहे हैं। प्रभाव दिखने के लिए इसे 50% से 60% तक ले जाना होगा। इलेक्ट्रिक कारों के लिए आकर्षक प्रोत्साहन देने होंगे।
फिर भी, धरती एक दिन में ठंडी नहीं होगी। हमें योजनागत तरीके से समुदाय आधारित वन प्रबंधन, और रिमोट सेंसिंग से जंगलों को बचाने पर पूरा ध्यान लगाना होगा।
(‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ में प्रकाशित संपादकीय पर आधारित-29/04/26)