भारत में विदेशी विश्वविद्यालयों के आने के मायने
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भारत उच्च शिक्षा में अंतरराष्ट्रीयकरण को बढ़ावा दे रहा है। इस कड़ी में कई विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में कैंपस खोलने की अनुमति मिल चुकी है। युवाओं और देश को इससे कई प्रकार के लाभ मिलने की संभावना है –
- इससे विदेशों के कॉलेजों की अधिक मान्यता वाली डिग्री पर कम खर्च होगा।
- वीज़ा की अनिश्चितता का कोई संकट नहीं रहेगा।
- वैश्विक स्तर के विश्वविद्यालयों में किए गए अकादमिक शोध की गुणवत्ता बेहतर होती है।
- इनसे होड़ में घरेलू विश्वविद्यालयों में शिक्षा और शोध में सुधार की उम्मीद की जा सकती है।
- उभरती हुई मांग के साथ पाठ्यक्रम में जरूरी बदलाव और विविधता आ सकती है।
- स्टॉफ और शिक्षकों की मांग बढ़ने के साथ ही उनके वेतन में भी बढ़ोत्तरी हो सकती है।
- विदेशी विश्वविद्यालयों को अपनी गुणवत्ता बनाए रखने के लिए विदेशी शिक्षक भी बुलाने पड़ेंगे। इसका अच्छा असर पड़ेगा।
- ह्यूमन रिसोर्स के क्षेत्र में नौकरी के अवसर बढ़ेंगे।
- भारत के बहुत से छात्र विदेशों में पढ़ने जाते हैं। उनके देश में ही शिक्षा ग्रहण करने से हमारे विनिर्माण क्षेत्र को भी लाभ होगा। तकनीक और उन्नत विनिर्माण जैसे खास क्षेत्रों में आगे बढ़ने के लिए प्रतिभा-पलायन को रोकना जरूरी है। विदेशी कैंपस के यहाँ आने से इसमें मदद मिलेगी।
- शिक्षा क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर का शोध और अनुसंधान एक मार्कर की तरह काम करता है। विदेशी कैंपस से इनकी संख्या और गुणवत्ता दोनों में अच्छा योगदान मिलना चाहिए।
(‘द इकॉनॉमिक टाइम्स’ में प्रकाशित संपादकीय पर आधारित-25/04/26)