विकसित भारत का आधार बने एमएसएमई

Afeias
07 Mar 2026
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भारतीय रिजर्व बैंक ने बीते दिनों बैंकों के लिए सूक्ष्म, मध्यम एवं लघु उद्योग के लिए बिना गारंटी वाले ऋण की सीमा 10 लाख से बढ़ाकर 20 लाख कर दी है। ‘क्रेडिट गांरटी ट्रस्ट फार माइक्रों एंड स्माल इंटरप्राइजेज‘ ऋण लेने वालों की गारंटी लेगा। इस बार के बजट में भी एमएसएमई की क्रेडिट सुविधा बढ़ाने के लिए 10000 करोड़ रुपये का फंड बनाने की घोषणा की गई है।

एमएसएमई से जुडे कुछ आंकड़े –

यह विनिर्माण उत्पादन का 35.4%, कुल निर्यात का 48.58% और सकल घरेलू उत्पाद का 31.1% हिस्सा है। देश के 7.47 करोड़ से अधिक उद्यम; जो 32.82 करोड़ लोगों को रोजगार देते हैं, एमएसएमई के अंतर्गत ही आते हैं।

वैश्विक स्तर पर 90% व्यवसाय और वैश्विक रोजगार का 50% योगदान एमएसएमई द्वारा ही दिया जाता है।

एमएसएमई से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातें –

  • 2024 में ‘उद्यमी भारत-एमएसएमई दिवस‘ के अवसर पर ‘यशस्विनी अभियान’ का शुभारंभ किया गया। इसका उद्देश्य लैंगिक समानता को बढ़ावा देना और महिला स्वामित्व वाले एमएसएमई से 3% न्यूनतम खरीद, सार्वजनिक खरीद में सुनिश्चित करना है।
  • गत वर्ष मिजोरम में संचालित अभियान से लगभग 8400 महिला स्वामित्व वाले एमएसएमई का पंजीकरण हुआ। कुल 12.5 लाख से अधिक महिला स्वामित्व वाले एमएसएमई का पंजीकरण हुआ है।
  • संयुक्त राष्ट्र औद्योगिक विकास संगठन द्वारा प्रकाशित ‘औद्योगिक विकास रिपोर्ट 2024’ में भारत का उल्लेख उभरती अर्थव्यवस्थों के रूप में किया गया है। भारत जैसे देश में विनिर्माण क्षेत्र का विस्तार तेजी से हो रहा है और औद्योगिक विविधीकरण भी बढ़ रहा है।
  • भुगतान में देरी, तकनीकि आधुनिकीकरण की कमी तथा समीति वैश्विक पहचान जैसी संरचानात्मक चुनौतियाँ भी हैं। हमें प्रति उद्यम उत्पादकता, गुणवत्ता मानकों और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता सुदृढ़ करने की जरूरत है।

अन्य देशों द्वारा एमएसएमई के लिए उठाए जाने वाले महत्वपूर्ण कदम –

  • दक्षिण कोरिया ने ‘लघु और मध्यम उद्यमों के लिए रूपरेखा अधिनियम‘ तथा ‘लघु मध्यम उद्यम एवं स्टार्टअप मंत्रालय‘ के माध्यम से छोटे उद्योगों को अनुसंधान विकास सहायता, स्केल अप रणनीति और कानूनी संरक्षण से जोड़ा है।
  • जापान ने ‘लघु एवं मध्यम उद्यम मूल अधिनियम’ के तहत अपने उद्योगों को आपूर्ति श्रृंखला आधारित ‘केइरेत्सु‘ मॉडल, उच्च गुणवत्ता मानकों और तकनीकि नवाचार से सशक्त किया।

इन दोनों देशों ने एमएसएमई हेतु सिर्फ एक पोषणात्मक व्यवस्था ही गठित नहीं की है। अपितु उन्हें वैश्विक प्रतिस्पर्धा के स्तर तक पहुँचाने की संरचित व्यवस्था भी विकसित की। भारत को भी इन नीतियों से सीखना चाहिए।

आर्थिक सामाजिक विकास में एमएसएमई कम पूँजी लागत पर पर्याप्त रोजगार सृजित करता है, बडे उद्योगों को सहयोग देता है तथा ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में औद्योगीकरण को बढ़ावा देता है। इससे आपूर्ति श्रृंखला, स्थानीय मूल्य संवर्धन और समावेशी क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा मिलता है। विकसित भारत के लिए एमएसएमई के लिए दीर्घकालिक व किफायती पूँजी, तकनीकि उन्नयन को प्रोत्साहन तथा निर्यात उन्मुख ब्रांड को बढ़ावा देने की आवश्यकता है।

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