एआई और रोजगार : आशा और आशंका के बीच

Afeias
03 Jul 2026
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एआई के प्रसार के साथ ही इससे जुड़े कई तर्क सामने आने लगे हैं। इनमें  एक यह भी है कि एआई रोजगारों को समाप्त नहीं बल्कि परिवर्तित करेगा। यह तर्क इतिहास से समर्थित है, क्योंकि औद्योगिक क्रांति, कंप्यूटर और इंटरनेट ने भी पुराने रोजगार खत्म किए। लेकिन नए अवसर भी पैदा किए। किंतु कई विशेषज्ञ मानते हैं कि एआई का प्रभाव पहले की तकनीकी क्रांतियों से अधिक व्यापक और तीव्र हो सकता है।

रोजगार हानि के संकेत –

विश्व आर्थिक मंच (WEF) की फ्यूचर ऑफ जॉब रिपोर्ट के अनुसार, 2030 तक वैश्विक स्तर पर लगभग 17 करोड़ नई नौकरियां पैदा हो सकती हैं। लेकिन साथ ही 9.2 करोड़ नौकरियां समाप्त भी हो सकती हैं। अर्थात व्यापक स्तर पर श्रम बाजार में उथल-पुथल देखने को मिलेगी।

इसी रिपोर्ट में 41% नियोक्ताओं ने कहा कि वे एआई द्वारा कार्यों के स्वचालन के कारण अपने कार्यबल को कम करने की योजना बना रहे हैं।

हाल के अध्ययनों से संकेत मिलता है कि एआई के कारण प्रवेश-स्तर (Entry-Level) की नौकरियों में अवसर सिमट रहे हैं और कंपनियां नए कर्मचारियों से पहले की तुलना में अधिक उन्नत कौशल की अपेक्षा कर रही हैं।

एन्थ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोदेई की चेतावनी –

एआई कंपनी एन्थ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोदेई ने कई बार चेतावनी दी है कि :

अगले पाँच वर्षों में एआई 50% तक एंट्री-लेवल व्हाइट-कॉलर नौकरियों को प्रभावित या समाप्त कर सकता है तथा बेरोजगारी दर को 10% से 20% तक बढ़ा सकता है।

उनके अनुसार कानून, वित्त, परामर्श, प्रशासन और सॉफ्टवेयर विकास जैसे क्षेत्रों में दोहराव वाले लेकिन बौद्धिक कार्य एआई द्वारा तेजी से किए जा सकेंगे।

दिलचस्प बात यह है कि अमोदेई केवल खतरे की बात नहीं करते, बल्कि यह भी कहते हैं कि यदि एआई उत्पादकता से विशाल आर्थिक लाभ पैदा करता है, तो समाज को उसके लाभों के पुनर्वितरण (Redistribution) और बड़े पैमाने पर पुनःकौशल (Reskilling) पर विचार करना चाहिए।

भारत के लिए चुनौती –

भारत की बड़ी आबादी आईटी सेवाओं, बीपीओ, डेटा प्रोसेसिंग और बैक-ऑफिस कार्यों पर निर्भर है। यदि एआई इन कार्यों को स्वचालित करता है, तो नए स्नातकों और मध्यम कौशल वाले कर्मचारियों के लिए अवसर घट सकते हैं। इसलिए भारत को केवल “एआई उपयोगकर्ता” नहीं, बल्कि “एआई निर्माता” बनने की दिशा में बढ़ना होगा।

निष्कर्ष –

एआई न तो पूर्णतः रोजगार विनाशक है और न ही केवल रोजगार सृजक। वास्तविकता इन दोनों के बीच है। भविष्य में नए रोजगार अवश्य पैदा होंगे, लेकिन संक्रमण काल कठिन हो सकता है।

इसलिए सबसे बड़ा प्रश्न यह नहीं है कि “क्या नौकरियां रहेंगी?”, बल्कि यह है कि “क्या लोग नई नौकरियों के लिए आवश्यक कौशल समय रहते प्राप्त कर पाएंगे?”

यही एआई युग की सबसे बड़ी आर्थिक और सामाजिक चुनौती है।

द टाइम्स ऑफ़ इंडिया में प्रकाशित संपादकीय पर आधारित।  (11/06/2026)