इथेनॉल की मिलावट पर कई पक्ष

Afeias
05 Jun 2026
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गैस और तेल के आयात की समस्‍या बढ़ती ही जा रही है। इसकी गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जाना चाहिए कि प्रधानमंत्री को इसकी बचत के लिए देशवासियों से अपील करनी पड़ी है। तेल की खपत की बात करें, तो ट्रांसपोर्ट सेक्‍टर में लगने वाले तेल का लगभग 90% आयात होता है। इससे निपटने के लिए सरकार के कुछ कदम और उनके संभावित प्रभाव –

  • सरकार ने सेन्‍ट्रल मोटर व्‍हीकल्‍स रूल्‍स में बदलाव का प्रस्‍ताव दिया है। ताकि इथेनॉल को 85% और 100% तक उपयोग में लाने को औपचारितक किया जा सके।
  • नियामक बनाए जाने चाहिए, परन्‍तु इससे दूसरे रास्‍ते बंद नहीं होने चाहिए। इथेनॉल की मिलावट को गाडि़यों के इंजन पर पड़ने वाले प्रभाव के मद्देनजर देखा जाना चाहिए। ऐसे तथ्‍य सामने आए हैं कि इथेनॉल से इंजन की आयु कम होती है।
  • दूसरा पक्ष इथेनॉल के लिए गन्‍ना, चावल या मक्‍का की फसलों पर निर्भरता का है। ये फसलें पानी ज्‍यादा लेती हैं। भू-जल की कमी से कई समस्‍याएं बढ़ती हैं। मक्‍का की फसल के साथ अन्‍य प्रकार के खतरे भी हैं। इसकी आपूर्ति ठीक रखने के लिए अमेरिकी मक्के का आयात किया जा सकता है, परन्‍तु यहाँ एक बार फिर आयात निर्भरता की बात आ जाती है।
  • इथेनॉल ट्रांसपोर्ट की लागत और उससे होने वाले उत्‍सर्जन की भी जांच होनी चाहिए।
  • गाड़ी के डिजाइन में ऐसे इंजन को प्राथमिकता देना शुरू करना चाहिए, जिसमें अलग-अलग इथेनॉल ब्‍लैंड के अनुसार लचीलापन हो। गाडि़यों के लिए आई दूसरी और तीसरी जेनरेशन इथेनॉल तकनीक में ऐसा किया जाना संभव है।
  • फिलहाल सरकार अपने प्रस्‍ताव पर हितधारकों की प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा कर रही है। आयात निर्भरता और परिवहन क्षेत्र के कार्बन फुटप्रिंट, दोनों को कम करने के विकल्‍पों को तलाशा जा रहा है।

(द इकॉनॉमिक टाइम्‍समें 07/05/2026 को प्रकाशित संपादकीय पर आधारित)