‘विकसित भारत’ के लिए हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र अहम

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24 Oct 2026
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हिमालय पर्वतमाला को अक्सर ‘तीसरा ध्रुव’ कहा जाता है, क्योंकि अंटार्कटिक और आर्कटिक के बाद हिमालय धरती पर बर्फ और हिमनद का सबसे बड़ा भंडार है।

इस ध्रुव पर स्थित 13 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में लगभग 5 करोड़ लोग रहते हैं, जो यहाँ के हिमनद और नदियों पर निर्भर हैं। ऐसी स्थिति में प्राकृतिक अस्थिरता का प्रभाव भी भयावह होगा, जैसा कि हमने नेपाल में आई बाढ़ के समय देखा।

हिमालयी क्षेत्र भारत के सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 4.5% का योगदान करता है। सिस्टमेटिक ने इंटीग्रेटेड माउंटेन इनिशिएटिव के साथ एक अध्ययन किया, जिसमें बताया गया कि 20% से अधिक उत्पादन हिमालय पारिस्थितिकी तंत्र पर निर्भर करता है। इसमें गेहूँ, चावल की खेती, चाय बागान, पनबिजली व तीर्थयात्रा पर्यटन शामिल हैं।

हिमालय की सुरक्षा के लिए क्या करना चाहिए?

हिमालय की सुरक्षा के लिए ‘हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र संरक्षण के लिए राष्ट्रीय मिशन’ हिमालयी राज्यों में जलवायु प्रकोष्ठ चलाता है। नीति आयोग ने ‘हिमालयी राज्य क्षेत्रीय परिषद’ का गठन किया है।

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के पास हिमनद झील समिति है। केंद्रीय जल आयोग 2843 झीलों तथा जल निकायों की निगरानी करता है। पर संपूर्ण हिमालय की मजबूती व समुदाय पर नजर रखने वाली एक संस्था होनी चाहिए।

  • नई सड़क, पनबिजली परियोजना या पर्यटन गलियारा — ये स्थानीय स्तर पर तुरंत लाभ देते हैं, पर इनका जोखिम नदी के बहाव की दिशा में दिखता है, जिससे दूसरे राज्य प्रभावित होते हैं। इसलिए हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र में संरक्षण, लचीलापन और विकास का प्रबंधन एक साथ मिलकर किया जाना चाहिए।
  • जिन हिमनदों, झरनों, जंगलों और जलस्रोतों पर निचले इलाकों की पानी, भोजन और ऊर्जा सुरक्षा निर्भर करती है, उनके खतरों का पहले से अंदाजा लगाते हैं और बेहतर जानकारी, जोखिम-आधारित नियोजन और समय पर कार्रवाई के जरिए उन्हें कम किया जाता है।
  • पुनर्योजी विकास के लिए सिस्टमेटिक ने 10 बदलाव चिह्नित किए हैं, जिनमें झरनों को बहाल करने से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित जानकारी शामिल है, जिस पर किए निवेश का 8 रुपये समायोजित रिटर्न मिलता है।
  • एस जेड कासिम की अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ समूह ने 1993 में हिमालय विकास प्राधिकरण को समर्पित एक कोष की सिफारिश की थी। 2018 में नीति आयोग ने हिमालय प्राधिकरण की सिफारिश की थी और क्षेत्रीय परिषद का गठन किया। किन्तु एक अधिकार संपन्न हिमालय विकास प्राधिकरण वह संस्था हो सकती है, जो पूरी व्यवस्था के जोखिम सहने की क्षमता के लिए जवाबदेह हो, जिसके पास एक पेशेवर सचिवालय, गहरी वैज्ञानिक क्षमता और वित्त-पोषण की व्यवस्था हो।
  • एचडीए के पास समर्पित वित्त-पोषण का माध्यम होना चाहिए, जिसमें बजट से मदद, उपयोगिता शुल्क तथा पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं के लिए भुगतान शामिल हों।
  • हिंदूकुश हिमालय का दायरा 8 देशों तक फैला हुआ है। नेपाल व भूटान के साथ हमारा सहयोग गहरा है। इसलिए हिमनदों पर नजर रखना हो या समय रहते चेतावनी देना, हमें संयुक्त कार्रवाई करनी चाहिए। शेष देशों के साथ भी वैज्ञानिक सहयोग और जानकारी साझा करने की प्रक्रिया अंतरराष्ट्रीय एकीकृत पर्वतीय प्रबंधन केंद्र के जरिए जारी रहनी चाहिए।
  • जो लोग पहाड़ों में जंगल या क्षेत्रों को बचाते हैं, उनके लाभ के लिए ‘हिमालयन कैटेलिस्ट’ बनाना चाहिए। यह संस्था पर्यावरण की देखभाल के लिए भुगतान की व्यवस्था तैयार करेगी।

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