श्रम संहिताओं से बड़े सुधार की संभावना

Afeias
29 Dec 2025
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सरकार ने 29 पुराने श्रम कानूनों को बदलकर 4 श्रम संहिताएं बनाई हैं। हाल ही में इन्हें लागू करने की घोषणा की गई है।

चार यूनिफाइड लेबर कोड या एकीकृत श्रम संहिताएं –

(1) वेतन

(2) औद्योगिक संबंध

(3) सामाजिक सुरक्षा

(4) व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य परिस्थिति।

लाभ –

  • कंपनियों के लिए अनुपालन के बोझ में काफी कमी आने की संभावना है।
  • उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा। भारत के सख्त श्रम कानूनों के कारण श्रम प्रधान उद्योग 100 से कम श्रमिक रखने पर मजबूर थे। बांग्लादेश, वियतनाम और चीन के ऐसे उद्योगों को ऐसी नीतियों का सामना नहीं करना पड़ता था, और वे आगे बढ़ते गए। अब भारत की कंपनियां भी अपना आकार बड़ा कर सकेंगी।
  • नए औद्योगिक संबंध कोड के दो कदम भारतीय श्रम बाजार को लचीला बनाते हैं –
  • एक लिखित निश्चित अवधि अनुबंध के चलते अब फर्म श्रमिक को नौकरी पर रखने के लिए बाध्य नहीं हैं।
  • यह कोड 300 श्रमिकों तक की कंपनियों को बिना सरकारी अनुमति के श्रमिक को निकालने की छूट देता है। पहले यह 100 श्रमिकों से कम की कंपनी को मिलती थी। यह कोड राज्यों को नोटिफिकेशन के जरिए इस सीमा को बढ़ाने का अधिकार भी देता है।
  • व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य वाली संहिता के नियम अब 50 या उससे अधिक श्रमिकों वाली फर्म पर लागू होंगे। यह सीमा पहले 20 श्रमिकों की थी।

कमियां –

  • लेबर यूनियनों का आरोप है कि सरकार ने दूसरे नेशनल कमीशन ऑन लेबर की श्रमिक-प्रोफाइल को नजरअंदाज किया है, और ‘नियोक्ता-समर्थक‘ सिफारिशों को शामिल किया है।
  • इंडियन लेबर कांफ्रेंस (आईएलसी) की 1940 से 2015 के बीच 46 बैठकें हो चुकी हैं। सरकार ने श्रम संहिताओं पर विचार विमर्श के लिए 47वीं बैठक पर कोई योजना नहीं बनाई है।
  • संहिताओं को लागू करने की पूरी प्रक्रिया में राज्यों की भी सक्रिय भागीदारी होनी चाहिए।

विभिन्न समाचार पत्रों पर आधारित। 25 नवंबर 2025