प्रारंभिक भाषा-शिक्षा का महत्व
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भाषा केवल बातचीत का माध्यम नहीं है, बल्कि यह किसी देश की संस्कृति, इतिहास और सोच को समझने का साधन भी है। इसलिए बच्चों को कम उम्र से ही कई भाषाएं सीखने के अवसर मिलने चाहिए।
भाषाई विविधता भारत के लिए चुनौती से अधिक सामाजिक और सांस्कृतिक पूंजी है। मातृभाषा बच्चे को अपनी संस्कृति और जड़ों से जोड़ती है। दूसरी भारतीय भाषाएं सीखने से देश की विविधता को समझने में मदद मिलती है। वहीं, फ्रेंच, अरबी, चीनी, स्पेनिश या जापानी जैसी विदेशी भाषाएं दुनिया को समझने का अवसर देती हैं।
बच्चे कम उम्र में भाषाएं आसानी से सीखते हैं और गलतियों से डरते नहीं हैं। इसलिए भाषा-शिक्षा को केवल परीक्षा या नौकरी का विषय न बनाकर रुचि और अनुभव से जोड़ना चाहिए। भारत में अंग्रेजी और भारतीय भाषाओं को एक-दूसरे का विकल्प मानने के बजाय बहुभाषिकता को बढ़ावा देना चाहिए।
मातृभाषा हमें अपनी जड़ों से, भारतीय भाषाएं देश से और विदेशी भाषाएं दुनिया से जोड़ती हैं। इसलिए बहुभाषी शिक्षा एक मजबूत, संवेदनशील और वैश्विक नागरिक बनाने में सहायक हो सकती है।
‘द इकोनॉमिक टाइम्स‘ में प्रकाशित संपादकीय पर आधारित। 16/09/26