पश्चिमी घाटों से मिली फिर एक चेतावनी
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बदलते जलवायु और मानव निर्मित स्थितियों से हमारी पारिस्थितिकी को बहुत नुकसान हो रहा है। इसी संदर्भ में पश्चिमी घाटों की भी चर्चा आती है। अपनी जैव विविधता और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध पश्चिमी घाट की कई प्रजातियां आज खतरे में हैं। कुछ बिंदु –
- पश्चिमी घाट में हाल ही में हुए दो साल के सर्वे में ड्रैगनफ्लाई और डैमसेल्फ्लाई प्रजातियों में 35% की गिरावट पाई गई है।
- यह सर्वे पांच राज्यों की 222 प्रजातियों को लेकर किया गया था। इसमें से केवल 143 अस्तित्व में हैं।
- इसका कारण बहुत समय से पता है। मीठे पानी के तंत्र में प्रदूषण, बेतरतीब बुनियादी ढांचा विस्तार, और खनन से यह समस्या उत्पन्न हुई है।
- ड्रैगनफ्लाई पारिस्थितिकीय प्रहरी का काम करती है। इसके गायब होने का मतलब पानी और हवा की गुणवत्ता का खराब होना है। यह एक चेतावनी दे जाती है।
- इसका अंदाजा 2011 में माधव गाडगिल समिति को पहले से ही रहा है। उन्होंने पश्चिमी घाट को बचाने के लिए यहाँ होने वाले निर्माण कार्यों पर रोक की सख्त मांग की थी। लेकिन सरकार ने समिति के रोडमैप पर ही रोक लगा दी।
दुनिया भर में यह संकट अभी भी चल रहा है। कुल मिलाकर, ड्रैगनफ्लाई की 16% प्रजातियों के खत्म होने का खतरा है। भारत में इसकी तीव्रता कुछ ज्यादा है। यह पूरी पारिस्थितिकी यानि मानव आजीविका तक को प्रभावित कर जाता है।
(‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ में प्रकाशित 25/04/26 के लेख पर आधारित)