जीवन में संतुलन बनाता जेनरेशन जी

Afeias
10 Sep 2026
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हाल ही में हैरान करने वाला एक ट्रेंड उभरकर आ रहा है। जेनरेशन ज़ी सिलाई, बुनाई और कपड़ों की मरम्‍मत करना सीख रही है। इतना ही नहीं, एक बहुराष्‍ट्रीय कंपनी ने तो इस हेतु क्‍लासेस लगानी भी शुरू कर दी है। इसे डिजिटल उथल-पुथल के बीच अपने लिए शांति की तलाश की तरह देखा जा रहा है।

इसे विडंबना कह सकते हैं, लेकिन यह अकेली विडंबना नहीं है। जेन ज़ी ने फास्‍ट फैशन के पर्यावरणीय दुष्‍प्रभावों का विरोध उन्‍हीं डिजिटल प्‍लेटफार्मों  पर करना शुरू कर दिया है, जो कपड़े बेचते भी हैं। आखिर यह ट्रेंड दुनिया को किस ओर ले जाना चाहता है –

  • डिजिटल की लत के कारण जीवन स्‍क्रीन, सोशल मीडिया एवं स्‍क्रोलिंग से घिरा हुआ है। सिलाई-बुनाई जैसी धीमी गति वाली गतिविधिया उन्‍हें मानसिक सुकून और रचनात्‍मकता का अनुभव कराती हैं।
  • फास्‍ट फैशन बनाम पर्यावरण –

जेन ज़ी और अल्‍फा अपने भविष्‍य के पर्यावरण के लिए भी सचेत हैं। वे फास्‍ट फैशन के खरीदो और जल्‍दी फेंको संस्‍कृति के बजाय कपड़े की मरम्‍मत और पुन: उपयोग का संदेश भी देना चाहते हैं। यह सतत् उपभोग की दिशा में छोटा किंतु महत्‍वपूर्ण कदम है।

  • लैंगिक समानता की ओर –

परंपरागत रूप से सिलाई-कढ़ाई महिलाओं का काम माना गया है। लेकिन लड़के भी इसे शौक और सृजनात्‍मक क्षमता की तरह अपनाकर सामाजिक धारणा को बदल रहे हैं। जेन ज़ी की दृष्टि में काम किसी लिंग विशेष का नहीं होता है, बल्कि समाज इसका विभाजन करता है।

कुल मिलाकर, यह एआई से आक्रांत दुनिया के लिए बहुत बड़ा संदेश है कि विकास का अर्थ केवल उत्‍पादन औरअधिक उपभोग नहीं है। वास्‍तविक प्रगति वह है, जिसमें तकनीकी सुविधाओं के साथ मानवीय कौशल, मानसिक संतुलन, सांस्‍कृतिक विरासत और पर्यावरणीय जिम्‍मेदारी भी संरक्षित रहें।

(‘द टाइम्‍स ऑफ इंडिया’ में प्रकाशित संपादकीय पर आधारित- 13/08/26)