गोद लेने वाली माताओं को समान अधिकार

Afeias
15 Apr 2026
A+ A-

To Download Click Here.

हाल ही में न्यायालय ने बच्चा गोद लेने वाली माताओं को भी 12 सप्ताह का वैतनिक अवकाश देने का निर्णय दिया है। इसके लिए बच्चे की उम्र कोई सीमा नहीं होगी। पहले केवल तीन माह से छोटे बच्चों को गोद लेने पर ही यह सुविधा दी जाती थी।

कुछ बिंदु –

  • संविधान पीठ ने यह निर्णय मातृत्व लाभ अधिनियम, 2017 के तहत इस प्रावधान को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई पर दिया है।
  • न्यायाधीश ने कहा कि गोद लेने की प्रक्रिया में ही लगभग तीन माह का समय लग जाता है।
  • न्यायाधीशों ने माना कि परिवार बनाने के लिए गोद लेना भी सही तरीका है। इसे प्रजनन स्वायत्तता का अधिकार (रिप्रोडक्टिव ऑटोनॉमी का एक्सप्रेशन) मानते हुए न्यायालय ने कहा है कि गोद लेने वाली मां के पास भी वही अधिकार और जिम्मेदारियां होती हैं, जो जैविक मां के पास होती हैं।
  • न्यायालय ने यह भी कहा है कि माँ, पिता और बच्चों का परिवार केवल खून के एक होने से नहीं, बल्कि यह साझा जिम्मेदारी और भावनात्मक जोड़ से बनता है।
  • न्यायाधीशों ने बच्चों की परवरिश को माता-पिता दोनों का दायित्व मानते हुए सरकार से पितृत्व अवकाश को सामाजिक सुरक्षा लाभ के रूप में कानूनी मान्यता देने का आग्रह भी किया है।

यह कहना उचित है कि उच्चतम न्यायालय ने सरकार से गोद लेने में मातृत्व अवकाश को नियंत्रित करने वाले अपर्याप्त कानूनों को ठीक करने का अवसर दिया है। अब यह सरकार की जिम्मेदारी है कि वह इस असरदार निर्णय को देश के हर कोने में तत्पराता से लागू करे।

द हिंदू’ में प्रकाशित संपादकीय पर आधारित। 20 मार्च 2026