डाकघरों और सरकार के अन्य विभागों की संपत्तियों से लाभ कमाया जाए
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डाक व्यवस्था या पोस्टल सर्विस लगभग अपने अंत पर है। दुनियाभर के देश इस व्यवस्था से जुड़ी संपत्ति को किराए पर देकर या बेचकर अच्छा लाभ कमा रहे हैं। भारत भी ऐसा कुछ कर सकता है –
- 65 लाख डाकघरों के साथ, भारतीय डाक दुनिया का सबसे बड़ा डाक वाहक है।
- इसे बंद करना कोई विकल्प नहीं है, क्योंकि 90% डाकघर ग्रामीण और दूरदराज या आदिवासी इलाकों में सेवाएं देते हैं।
- सरकार इंडिया पोस्ट को एक लॉजिस्टिक फर्म में बदलकर राजस्व बढ़ाने की कोशिश कर रही है। उदाहरण के लिए दूरदराज के इलाकों में अमेज़न के पैकेज पहुँचाना।
- शहरी क्षेत्रों में बने 15,823 बड़े डाकघरों में ऊपरी मंजिलें बनाकर पट्टे पर दी जा सकती हैं। इस पर काम किया जा रहा है।
विदेशों के उदाहरण –
- डेनमार्क सभी लेटर बॉक्स हटा रहा है, क्योंकि सन् 2000 के बाद से व्यक्तिगत डाक की मात्रा में 90% की गिरावट आई है।
- ब्रिटेन की 500 साल पुरानी रॉयल मेल पिछले वर्ष बेच दी गई।
- अमेरिकी डाक सेवा को गत वर्ष 9.5 अरब डॉलर की हानि हुई है।
अन्य सरकारी विभागों की अंडरयूज्ड लैंड एसेट्स –
- भारत सरकार के पास 15,500 वर्ग कि.मी. भूमि है। यह दिल्ली के क्षेत्रफल से 10 गुना अधिक है।
- रेलवे के पास लगभग 4,900 वर्ग कि.मी. भूमि है। इसमें से केवल 2% से भी कम हिस्से को पट्टे पर दिया गया है।
- रक्षा मंत्रालय के पास लगभग 50% अधिक भूमि है।
- नीति आयोग की सलाह है कि सरकार के सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों की भूमि और अन्य संपत्ति का ‘स्वामित्व, धारण, प्रबंधन और मुद्रीकरण‘ किया जाना चाहिए।
‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ में प्रकाशित संपादकीय पर आधारित। 8 जुलाई, 2025
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