भारत-रूस संबंधों में संतुलन

Afeias
07 Jan 2026
A+ A-

To Download Click Here.

रूसी राष्ट्रपति पुतिन का भारत आगमन और उनसे विभिन्न विषयों पर हुई चर्चा और समझौते बहुत महत्व रखते हैं।

कुछ बिंदु –

  • दोनों पक्षों के लिए रणनीतिक स्वायत्तता मजबूत हुई है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद अंतरराष्ट्रीय जगत में रूस केवल चीन पर निर्भर दिखाई दे रहा था। इधर भारत भी अमेरिका के साथ टैरिफ युद्ध में फंसा हुआ कुछ गुंजाइश चाहता था।
  • दूसरे, रूस-यूक्रेन युद्ध में शांति के लिए भारत पहल करता रहा है। इस दौर में भी मोदी ने अपना सहयोग दोहराया है। यह इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि युद्ध के लंबा चलने पर रूस चीन की जकड़ में रहेगा। यह भारत और पश्चिम दोनों के लिए चिंता की बात है।
  • दोनों पक्षों ने अप्रवासन और लेबर मोबिलिटी (श्रमिक गतिशीलता) पर समझौता किया है।
  • रक्षा और ऊर्जा पर आगे बढ़ने पर जोर दिया गया है। रूस से सैन्य हार्डवेयर की आपूर्ति होनी है। इसमें देर हो चुकी है, और देशी उत्पादन के लिए रूस से मदद ली जानी है। ऊर्जा के मामले में भारत अपनी शर्तों पर आगे बढ़ना चाहता है। कुल मिलाकर, इससे भारत ने पश्चिम को संदेश दे दिया है कि भारत अभी भी रूस के साथ आर्थिक रूप से जुड़ने के दूसरे तरीके ढूंढ रहा है।
  • भारत ने रूस से तेल आयात पर कोई घोषणा नहीं की है। इससे 2030 तक 100 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार के लक्ष्य पर प्रभाव पड़ सकता है।

इस पूरे एजेंडे में भारत ने तेल जैसे रणनीतिक मुद्दे पर जानबूझकर कोई स्पष्ट घोषणा इसलिए नहीं की है, क्योंकि वह अमेरिका और यूरोपियन एशियन के साथ चल रही वार्ताओं पर नकारात्मक प्रभाव नहीं डालना चाहता है।

विभिन्न समाचार पत्रों पर आधारित। 8 व 9 दिसंबर, 2025