भारत में आने वाला उपभोग विस्फोट

Afeias
16 Sep 2026
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हाल ही में अमेरिका की एक कंपनी नीलसन आइक्‍यू (प्रमुख उपभोक्‍ता बुद्धिमत्ता कंपनी) ने अनुमान लगाया है कि आने वाले दस वर्षों में भारत वैश्विक उपभोग के सबसे बड़े देशों में शामिल हो सकता है। इसकी गणना के अनुसार वर्ष 2036 तक भारत में लगभग 10.8 करोड़ संपन्‍न उपभोक्‍ता हो सकते हैं। अगर वास्‍तव में ऐसा हो सकता है, तो यह केवल उपभोक्‍ताओं की संख्‍या बढ़ने वाली बात नहीं है, बल्कि भारत के आर्थिक विकास, रोजगार, विनिर्माण, निवेश और ब्रांडो के वैश्‍वीकरण के लिए भी महत्‍वपूर्ण अवसर हो सकता है।

इससे जुड़े कुछ बिन्दु –

  1. केवल नीलसन आईक्‍यू ही नहीं, बल्कि 2024 में गोल्‍डमैन सैक्‍स ने भी भविष्‍यवाणी की थी कि 2027 तक दस करोड़ भारतीय संपन्‍न वर्ग में गिने जा सकते हैं। 2019 के बाद से इस वर्ग की संख्‍या लगभग 12-13% वार्षिक दर से बढ़ी है, और 2023 तक यह लगभग 6 करोड़ पहुंच चुकी थी।
  2. अगर यह अनुमान संभव होता है, तो इस मामले में भारत चीन को पीछे छोड़ सकता है। यद्यपि चीन की जीडीपी भारत की तुलना में 5 गुना अधिक है, लेकिन भारत में धनी वर्ग के बढ्ने के कई कारण हैं –
  • जीवन यापन की अपेक्षाकृत कम लागत।
  • वस्‍तुओं और सेवाओं की कम कीमतें।
  • क्रय शक्ति समता के आधार पर अधिक वास्‍तविक क्रय शक्ति।
  • तेजी से बढ़ता मध्‍यम वर्ग, तथा
  • आय और उपभोग क्षमता में निरंतर वृद्धि।
  1. भारत के जीडीपी में निजी उपभोग का बड़ा योगदान है। अत: अनुमान के अनुसार अधिक आय से उपभोग बढ़ सकता है। साथ ही अगर उत्‍पादन क्षमता, रोजगार और वास्‍तविक आय भी समान गति से बढ़ सकी, तो भारत की आर्थिक वृद्धि 7% के आसपास के औसत से आगे बढ़ सकती है।
  2. इसके साथ ही एक चुनौती यह भी है कि यदि भारतीय कंपनियां बढ़ती प्रीमियम मांग को पूरा नहीं कर पाईं, तो बहुराष्‍ट्रीय कंपनियां बाजी मार ले जाएंगी। इससे निपटने के लिए भारत को वैश्विक ब्रांड उतारने होंगे, नवाचार में निवेश करना होगा।

भारत के लिए यह एक बड़ा आर्थिक अवसर हो सकता है। लेकिन केवल उपभोक्‍ताओं की संख्‍या बढ़ना पर्याप्‍त नहीं है। इस बढ़ती मांग का लाभ भारतीय विनिर्माताओं और भारतीय ब्रांडों को मिलना चाहिए।

(‘द टाइम्‍स ऑफ इंडिया’ में प्रकाशित संपादकीय पर आधारित- 15/08/2026)