भारत में कारोबार करना है, तो भारत के नियम मानने होंगे
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हाल ही में भारत सरकार ने बीबीसी आई की जांच में सामने आने के बाद इंस्टाग्राम पर बाल यौन शोषण से जुड़े नेटवर्क तक ले जाने वाले विज्ञापनों को तुरंत हटाने का निर्देश मेटा को दिया है। मेटा का कहना है कि उसकी नीति बच्चों के यौन शोषण के प्रति “शून्य सहिष्णुता” की है। लेकिन यह घटना दर्शाती है कि केवल एल्गोरिदम आधारित निगरानी पर्याप्त नहीं है।
यह निर्देश अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि—
- भारत मेटा का सबसे बड़ा बाजार है। फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप के भारत में 1 अरब से अधिक उपयोगकर्ता हैं।
- ऐसे में कंपनी की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि उसके प्लेटफॉर्म पर कोई भी सामग्री या विज्ञापन भारतीय कानूनों का उल्लंघन न करे।
- यदि ऐसा होता है, तो मेटा आईटी अधिनियम, 2000 के तहत मिलने वाली “सेफ हार्बर” सुरक्षा खो सकता है, जिससे वह उपयोगकर्ताओं द्वारा पोस्ट की गई सामग्री के लिए भी कानूनी रूप से उत्तरदायी हो सकता है।
- सरकार पहले भी मेटा से व्हाट्सएप पर यूज़रनेम फीचर लागू करने की योजना रोकने को कह चुकी है। सरकार का तर्क था कि इससे साइबर अपराधियों को अपनी पहचान छिपाना आसान हो जाएगा।
- न केवल भारत, बल्कि यूरोपीय संघ में भी मेटा बच्चों की सुरक्षा को लेकर जांच का सामना कर रहा है। आरोप हैं कि फेसबुक और इंस्टाग्राम 13 वर्ष से कम आयु के बच्चों को अपने प्लेटफॉर्म से प्रभावी ढंग से दूर नहीं रख पा रहे हैं।
- साथ ही, मेटा के रिकमेंडेशन एल्गोरिदम बच्चों में सोशल मीडिया की लत बढ़ाने के लिए भी आलोचना झेल चुके हैं।
मेटा के लिए चुनौती यह है कि भविष्य के उपयोगकर्ता बच्चे और किशोर ही हैं, जबकि उसकी आय मुख्य रूप से विज्ञापनों से आती है। इसी कारण कंपनी पर बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और व्यावसायिक हितों के बीच संतुलन बनाने का दबाव लगातार बढ़ रहा है।
प्रमुख कानूनी एवं नीतिगत प्रावधान –
- सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (सेफ हार्बर – धारा 79)
- सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश एवं डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021
- पॉक्सो अधिनियम, 2012, तथा
- भारतीय न्याय संहिता, 2023 के साइबर अपराध संबंधी प्रावधान
सरकार द्वारा उठाए गए प्रमुख कदम –
- सोशल मीडिया कंपनियों के लिए अनिवार्य शिकायत निवारण अधिकारी की व्यवस्था।
- सीएसएएम (CSAM) और अन्य अवैध सामग्री को हटाने के लिए समयबद्ध कार्रवाई का प्रावधान।
- राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (gov.in) के माध्यम से ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने की सुविधा।
- आई4सी (I4C) के माध्यम से साइबर अपराधों की जांच और राज्यों के बीच समन्वय, तथा
- बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए जागरूकता अभियान तथा कानून प्रवर्तन एजेंसियों का प्रशिक्षण।
डिजिटल प्लेटफॉर्म केवल तकनीकी कंपनियाँ नहीं, बल्कि सार्वजनिक संवाद और सूचना के महत्वपूर्ण माध्यम बन चुके हैं। इसलिए उनका दायित्व केवल लाभ कमाना नहीं, बल्कि उपयोगकर्ताओं; विशेषकर बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है।
भारत जैसे बड़े डिजिटल बाजार में कार्य करने वाली वैश्विक कंपनियों को भारतीय कानूनों का पूर्ण पालन करना होगा। बच्चों की सुरक्षा के मामले में एल्गोरिदम नहीं, बल्कि मजबूत मानव निगरानी, प्रभावी नियमन और कठोर जवाबदेही ही स्थायी समाधान प्रदान कर सकती है।
‘द इकोनॉमिक टाइम्स‘ में प्रकाशित संपादकीय पर आधारित। (07/07/26)