भारत के पर्यटन को विविधतापूर्ण बनाने की जरूरत

Afeias
12 Jun 2026
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पिछले कुछ समय में भारतीय पर्यटकों की संख्‍या तेजी से बढ़ी है। इसमें अमीर भारतीय भी हैं, जो विदेश यात्राओं पर बहुत खर्च कर रहे हैं। इतना ही नहीं, अंतरराष्‍ट्रीय पर्यटकों में भारतीय नंबर एक पर भी आ सकते हैं। सरकार ने विदेशी मुद्रा बचत के लिए सोने पर तो आयात शुल्‍क बढ़ा दिया है, लेकिन पर्यटकों के जरिए होने वाले खर्च को वह कैसे रोके। इसके लिए सरकार देश्‍शवासियों पर नैतिक दबाव बना रही है। उन्‍हें विदेश यात्राएं न करने की सलाह दे रही है।

भारतीयों का एक वर्ग ऐसा है, जो इससे भी बड़ा है। यह घरेलू पर्यटन में विश्‍वास रखता है। सरकार भी धार्मिक और सांस्‍कृतिक पर्यटन केन्‍द्रों के विकास पर बल देती रही है।

घरेलू पर्यटन के पीछे बुनियादी ढाचे का विकास और उड्डयन क्षेत्र का तेजी से विस्‍तार कर रहा है। उपभोक्‍ताओं को ईंधन आयात की असली कीमतों की जानकारी नहीं दी जा रही है। सरकार यहाँ भी देशवासियों पर नैतिक दबाव बना रही है। दरअसल, पर्यटन का अलग-अलग राज्‍यों में अलग-अलग प्रभाव देखने को मिलता है। यह कमजोर आर्थिक वर्ग को ज्‍यादा प्रभावित कर सकता है। अत: सरकार ईंधन के दामों में एकदम से तेजी नहीं ला सकती है।

  • ऊर्जा संकट से पर्यटन उद्योग की संरचनात्‍मक कमियों का भी पता चल रहा है। इसे धारणीय बनाने के लिए धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ इसमें विविधता भी लाई जानी चाहिए। पर्यटन और आतिथ्‍य सत्‍कार में रोजगार को बचाए रखने के लिए सहकारी संघवाद पर अधिक काम होना चाहिए। भारत के पर्यटकों को विदेश में छुट्टियां मनाने के बजाय घरेलू पर्यटन स्‍थलों पर रोकने के लिए और काम करने की जरुरत है।

(द इकॉनॉमिक टाइम्‍समें प्रकाशित संपादकीय पर आधारित-16/05/2026)