कीमतों का दबाव

Afeias
10 Apr 2026
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उपभोक्ता मूल्य सूचकांक का दूसरा डेटा हाल ही में जारी किया गया है। यह भारत के आर्थिक परिदृश्य के भविष्य की झलक देता है।

कुछ बिंदु –

  • पुरानी सीरीज की तुलना में नई सीरीज में खाद्य सामग्री को कम वेटेज दिया गया है। फिर भी यह 36.75% है। यह प्रतिशत भी महंगाई को बढ़ाने में बड़ी भूमिका रखता है। फरवरी में खाने-पीने की चीजों की महंगाई 2.1% से बढ़कर 35% हो गई।
  • खाद्य सामग्री की महंगाई आगे भी बढ़ने की आशंका है। इसके कई कारण बताए जा रहे हैं –
    • मानसून के बीच अलनीनो के प्रभाव का अनुमान, तथा
    • पश्चिम एशिया में चलने वाला युद्ध।
  • महंगाई बढ़ने के अन्य कारणों में सोने-चांदी की कीमतों में लगातार वृद्धि भी है। दुनिया भर में अनिश्चितता के माहौल में इन कीमती धातुओं की कीमत कम होने की उम्मीद भी नहीं है।
  • तेल की बढ़ती कीमतें और एलपीजी व एलएनजी की कमी पहले से ही उद्योगों पर भारी पड़ रही है। इसका असर उपभोक्ताओं पर ही पड़ेगा।
  • यह आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति के सामने एक चुनौती है। महंगाई बढ़ने का कारण आपूर्ति की बाधाएं हैं। इसलिए ब्याज दरों को बढ़ाकर मांग कम करने की कोशिश का महंगाई पर कम असर पड़ेगा। साथ ही, आर्थिक वृद्धि को और नुकसान हो सकता हैं। इससे बचने का तरीका यही है कि जल्द-से-जल्द ईंधन की आपूर्ति अबाधित हो सके।

‘द हिंदूमें प्रकाशित संपादकीय पर आधारित। 14 मार्च 2026