पैक्स सिलिका से जुड़े भारत के लाभ और चुनौतियां

Afeias
25 Mar 2026
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हाल ही में भारत ने पैक्स सिलिका गठबंधन में प्रवेश कर लिया है। पैक्स सिलिका से जुड़ी जानकारी इससे पहले के एक लेख में दी जा चुकी है। इस लेख में हम इस समझौते से भारत को होने वाले लाभ और चुनौतियों के बारे में देखेंगे।

कुछ बिंदु –

लाभ –

  • एआई और दुर्लभ खनिजों से जुड़े अमेरिका के नेतृत्व वाले गठबंधन से जुड़कर भारत ने तकनीक के क्षेत्र में एक रणनीतिक कदम उठाया है।
  • इसकी सदस्यता से भारत के सेमीकंडक्टर, एआई और दुर्लभ खनिजों से जुड़े उद्योगों को तेज गति मिल सकती है।
  • भारत के पास अभी दुर्लभ खनिजों के प्रसंस्करण की कोई ठोस क्षमता नहीं है। इनका खनन भी अधिक मात्रा में नहीं हो रहा है। इस समूह में शामिल होकर भारत का लक्ष्य कच्चे माल की आपूर्ति और उन्नत उपकरणों को सुरक्षित करना, निवेश को आकर्षित करना तथा वैश्विक तकनीक जगत और उसके सुरक्षा मानकों को प्रभावित करना है।

चुनौतियां –

  • इसके बदले भारत को चीन से संभावित आर्थिक जवाबी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। व्यापार में रुकावट, बाजार तक धीमी पहुँच या सबसे ज्यादा खनिज और फार्मास्यूटिकल क्षेत्र पर दवाब जैसी रुकावटें आ सकती हैं।
  • इस गठबंधन से निर्यात-नियंत्रण और तकनीक-हस्तांतरण से जुड़ी उम्मीदों में भारत बंध सकता है।
  • भारत के घरेलू एआई नियमों को अमेरिका प्रभावित कर सकता है।
  • वैश्विक वैल्यू श्रृंखला में शामिल होने की कोशिश कर रही छोटी भारतीय कंपनियों को कड़े सुरक्षा ऑडिट के चलते आर्थिक और समय का दबाव झेलना पड़ सकता है।

गठबंधन की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि उसके सदस्य बातचीत से आगे बढ़कर एक रियल-वर्ल्ड सप्लाई चेन बनाएं; एक ऐसी श्रृंखला, जहाँ कच्चे खनिजों को निकाला जाए, उन्हें रिफाइन किया जाए, चिप्स में बदला जाए और एआई को सशक्त बनाने के लिए उपयोग में लाया जाए।

‘द हिंदूमें प्रकाशित संपादकीय पर आधारित। 23 फरवरी 2026