मिस-सेलिंग पर आरबीआई का निर्देश
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- हाल ही में आरबीआई ने इस तथ्य को पहचान लिया है कि मिस-सेलिंग या बैंकों में उपभोक्ताओं को गुमराह करके बेची जाने वाली योजनाओं को रोका जाना चाहिए।
- 2023 के एस एंड पी ग्लोबल सर्वे के अनुसार केवल 27% भारतीय वयस्क वित्तीय साक्षर हैं। इससे लाखों लोग बैंकों में बेचे जाने वाली उन योजनाओं का शिकार हो जाते हैं, जो उनकी उम्र, आय या रिस्क लेने की क्षमता के हिसाब से सही नहीं होती हैं। ऐसी योजनाओं से बैंक हजारों करोड़ रुपए कमा रहे हैं।
- आरबीआई के जुलाई से लागू होने वाले नए निर्देश में कहा गया है कि अगर कोई बैंक किसी उपभोक्ता की प्रोफाइल के लिए सही योजना नहीं होता है, तो वह मिस-सेलिंग का दोषी माना जाएगा। मिस-सेलिंग साबित होने पर पूरा रिफंड दिया जाना चाहिए।
- आरबीआई के इन निर्देशों का आम जनता के लिए लाभदायक सिद्ध होने की आशा है, क्योंकि यह शक्ति को संतुलित करने में मदद करते हैं। कई ग्रामीण मामलों में 62% उपभोक्ता बताते हैं कि छोटे लोन लेते समय भी उन्हें एड-ऑन प्रोडक्ट खरीदने के लिए धमकाया जाता है। इसके पीछे कर्मचारी का सेल्स टारगेट प्राप्त करने का लालच और दबाव दोनों होता है। 2024 के एक सर्वे में 57% बैंक रिलेशनशिप मैनेजरों ने माना कि उन पर मिस-सेलिंग का दबाव था।
विदेशों में भी यही प्रथा –
- अमेरिका के चार बड़े बैंकों में से एक पर कई करोड़ बैंक खाते खोलने और उन पर क्रेडिट कार्ड जारी करके 18.5 करोड़ डॉलर जुर्माना लगाने का आरोप लगा था। यह घटना एक चेतावनी है।
बैंक तो जनता के भरोसे और पैसे के रक्षक हैं। उन्हें यह याद रखना चाहिए।
‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ में प्रकाशित संपादकीय पर आधारित। 13 फरवरी 2026