कांफ्रेंस ऑफ पार्टीज़ का 30वां सम्मेलन संपन्न
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दस वर्ष पूर्व पेरिस समझौते में 195 देशों ने यह प्रण लिया था कि धरती के तापमान में 2॰ से. से ज्यादा की वृद्धि नहीं होने देंगे। जहाँ तक हो सकेगा, इसे 1.5॰ पर नियंत्रित करके रखेंगे। लेकिन 2024 में ही तापमान 1.5॰ सें. को पार कर गया है। हाल ही में कांफ्रेंस ऑफ पार्टीज का 30वां सम्मेलन ब्राजील के बेलेम में संपन्न हुआ है।
इससे जुड़े कुछ बिंदु –
- 5॰ सें. पर तापमान को बनाए रखने के लिए देशों को पारंपरिक ईंधन से दूरी बनाए रखने की बात काफी समय से की जा रही है।
- इस बदलाव के साथ अपनी अर्थव्यवस्था को प्रतिस्पर्धत्मिक बनाए रखना एक चुनौती है।
- इन लक्ष्यों को बनाए रखने के लिए जिम्मेदारी और वित्त को लेकर विश्व में दो बड़े समूह बने हुए हैं। एक समूह, विकसित देशों और उनसे जुड़े साथियों के नेतृत्व में है। इन्होंने जीवाश्म ईंधन को खत्म करके धीरे-धीरे नवीकरणीय ऊर्जा को अपनाने के रोडमैप पर जोर दिया है। दूसरा समूह, विकासशील और तेल पर निर्भर (पेट्रोस्टेट) अर्थव्यवस्थाओं का है। ये विकसित देशों से ज्यादा धन और एक्शन की मांग करते हैं।
- ब्राजील में इस बात पूरा जोर दिया गया कि बहुपक्षीय दृष्टिकोण और ‘म्यूटिराओ’ यानि एक साथ मिलकर काम करने से ही लक्ष्य प्राप्त किए जा सकेंगे।
- सम्मेलन में ‘अनुकूलन’ और ‘न्यायपूर्ण परिवर्तन’ पर बहुत फोकस रहा है। ये दो ऐसी अवधारणाएं हैं, जो जलवायु परिवर्तन के रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ने वाले प्रभाव को मानती हैं। देशों को जलवायु डिफेंस बेहतर करने में मदद के लिए तैयार करती हैं।
- विकासशील देशों में भारत की जगह काफी प्रभावशील है। भारत ने सम्मेलन में व्यक्त चिंताओं से सहमति जताई है, परंतु अपने स्वच्छ ऊर्जा अपनाने पर एक्शन की घोषणा नहीं की है।
- अमेरिका इस सम्मेलन में शामिल नहीं हुआ। इससे विकसित देशों की जिम्मेदारी का भार बंट नहीं सका। फिर भी, सीओपी 30 ने कार्यान्वयन पर जैसा जोर दिया है, उससे जलवायु संबंधी परिस्थितियां बेहतर होने की उम्मीद है।
‘द हिंदू’ में प्रकाशित संपादकीय पर आधारित। 27 नवंबर 2025
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