‘उड़ान’ के बाद अब ‘मौडिफाइड उड़ान’
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2016 में सरकार ने आम नागरिकों के लिए हवाई यात्रा को संभव बनाने हेतु ‘उड़ान’ या यूडीएन/उड़े देश का आम नागरिक योजना की शुरुआत की थी। लेकिन यह बहुत अधिक सफल नहीं हो सकी, क्योंकि –
- सहायक बुनियादी ढांचे की कमी रही।
- यात्रियों की कमी या अघोषित मांग।
- संचालन की पूरी लागत न निकल पाना।
- हवाई यात्रा के प्रति जागरुकता की कमी।
- रेल और रोड आवागमन के साधनों से प्रतियोगिता, तथा
- ऐसे हवाई मार्ग चुनना, जहाँ आर्थिक गतिविधियों की कमी है।
इस योजना की कमियों को देखते हुए सरकार ने ‘मॉडिफाइड उड़ान’ योजना को मंजूरी दे दी है। इस योजना में छ: गुना अधिक खर्च किया जाना है।
कुछ महत्वपूर्ण बिन्दु –
- योजना में एयरलाइन को सीधे सब्सिडी दी जाएगी।
- अगले दस सालों में सरकार इस योजना पर खर्च के लिए 10,043 करोड़ रुपये अलग रखेगी।
- बेकार पड़ी सौ हवाईपट्टियों को फिर से बनाने के लिए 12,159 करोड़ रुपये दूर-दराज के इलाकों में 200 हैलीपेड बनाने के लिए 3,661 करोड़ रुपये खर्च करेगी।
- सरकारी एयरलाइनों के लिए हवाई जहाज और हेलीकॉप्टर खरीदे जाएंगे, ताकि दूरस्थ इलाकों के लोग भी हवाई संपर्क में रह सकें।
- इस योजना में कम ट्रेफिक वाले हवाई हड्डों पर स्टाफ रखरखाव का खर्च भी सरकार देगी।
विडंबना यह है कि मॉडीफाईड योजना में सरकार ने खर्च तो बढ़ा दिया है, लेकिन पहली योजना की विफलता की जड़ पर काम नहीं किया है। कम आबादी वाले इलाकों में हवाई यात्रा रुट को शुरु किया जाना चाहिए। डिमांड के बिना सब्सिडी के सहारे रुट लंबे समय तक (यानि तीन साल से इसे कम कर दिया जाएगा) चलाए जाने पर काम किया जाना चाहिए। इसके बजाय एक ऐसे बाजार को तैयार किया जाना चाहिए, जो अपने दम पर खड़़ा हो सके।
‘द हिन्दू’ में प्रकाशित संपादकीय पर आधारित 30/03/26