सुरक्षित खाद्य पदार्थों के लिए मजबूत मानकों की जरूरत

Afeias
26 Aug 2026
A+ A-

To Download Click Here.

कुछ वर्ष पहले यूरोपीय संघ ने आयात होने वाले खाद्य पदार्थों जैसे मछली, दुग्ध, शहद पशु उत्पदों में एंटीबायोटिक्स के प्रयोग वाले सामानों पर रोक लगाई थी। ईयू ने उन एंटीबायोटिक्स की एक सूची भी जारी की थी, जो इंसानों के लिए आवश्यक हैं, पर उन्हें जानवरों के लिए प्रयोग की अनुमति नहीं दी जाएगी। 2023 में ईयू द्वारा जारी इस सूची में भारत भी शामिल था। सितंबर 2026 में इसके निर्देश लागू होने वाले थे।

भारत सरकार ने इस प्रतिबंध पर प्रतिक्रिया स्वरूप अक्टूबर 2024 में भारतीय खाद्य संरक्षण और मानक प्राधिकरण ने उन एंटीबायोटिक्स की एक सूची जारी की, जिनमें मांस, दूध, पोल्ट्री, अंडे और जलीय कृषि उत्पादों के उत्पादन के किसी भी चरण में रोक लगा दी गई। साथ ही सहनशीलता सीमा भी तय की गई। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा 2025 में 37 में से 34 एंटीबायोटिक्स के पशुओं पर प्रयोग में रोक लगाई, जो इंसानों के लिए बहुत जरूरी एंटीबायोटिक्स हैं। अब ईयू द्वारा भारत को अपनी पशु-उत्पाद आयात की सूची में शामिल कर लिया गया है।

कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न व सुझाव –

1) खाद्य सुरक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी इतनी महत्वपूर्ण नीतियाँ बाहरी उपभोक्ताओं के दबाव में क्यों बनाई जाती है?

  • एंटीआयोटिक प्रतिरोध एक खामोश महामारी की तरह है। हम जीवन रक्षक दवाओं के बेअसर होने से पड़ने वाले स्वास्थ्य बोझ को नहीं झेल सकते। वर्ष 2010 में सेटर फॉर साइंस एंड इनवायमेंट के विश्लेषणाात्मक अध्ययन के आाधार पर शहद में एंटीबायोटिक्स के खिलाफ एक सलाह जारी की गई। सरकार दुग्ध एवं मांस सहित अन्य उत्पाद देने वाले मवेशी में एंटीबायोटिक्स के प्रयोग रोकने के लिए कदम उठा रही है। वर्ष 2019 में सरकार ने खाद्य-उत्पादक जानवरों और जलीय कृषि उत्पादों में कोलिस्टिन के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया।

निर्यात बाजारों की सुरक्षा के साथ-साथ यह कदम हमारी सेहत की रक्षा के लिए भी अच्छा है।

2) हमें कीटनाशक अवशेषों, खाद्य योजकों और अन्य विषाक्त पदार्थों के लिए कड़े मानकों की जरूरत है।

  • अमेरिकी खाद्य एवं दवा प्रशासन के आयात अस्वीकृत डेटाबेस पर एक नजर डालने से पता चलता है कि वर्ष 2024-25 में भारत से भेजे गए लगभग 2700 खाद्य पदार्थों की खेप को अमेरिका में प्रवेश की इजाजत नहीं दी गई। इनमें मसाले, चावल और दाल शामिल थे। इन्हें अत्यधिक या वर्जित कीटनाशक अवशेषों के कारण रोका गया था।

3) इन मानकों को लागू कैसे किया जाए?

  • आयात करने वाले देशों ने अधिकृत प्रयोगशालाओं और यहाँ तक कि अपनी सीमाओं पर गुणवत्ता और अवशेषों की जांच के आधार पर निगरानी प्रणालियाँ विकसित की हैं। हम भी ऐसा कर सकते हैं।
  • ईयू द्वारा आयातित सामान का ऐसा स्वास्थ्य प्रमाण पत्र दिया जाए, जो सरकारी एजेंसी द्वारा जारी किया गया हो। वह निर्यात करने वाले देशों में आडिट और सीमा पर औचक जाँच भी करेगा।

*****