स्थिरीकरण कोष को स्वीकृत किया जाना

Afeias
13 Apr 2026
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अनुदानों की पूरक मांग को देखते हुए सरकार ने वर्तमान वित्तीय वर्ष के लिए आर्थिक स्थिरीकरण कोष या इकॉनॉमिक स्टेबलाइजेशन फंड को स्वीकृति दे दी है। यह एक लाख करोड़ रुपए का राजकोषीय बफर है। इसका उद्देश्य आर्थिक स्थिरता और लचीलापन बढ़ाना है।

क्या होता है स्थिरीकरण कोष – संविधान के अनुच्छेद 115 के तहत, यह सरकार या केंद्रीय बैंक द्वारा स्थापित एक वित्तीय आरक्षित कोष है, जो तेल जैसी वस्तुओं के राजस्व में भारी उतार-चढ़ाव से अर्थव्यवस्था को बचाता है। इस फंड का उपयोग मंदी या कीमतों में गिरावट के समय राजकोषीय स्थिरता को बनाए रखने के लिए किया जाता है। यह ‘शॉक एब्जॉर्बर‘ की तरह काम करता है।

समय की मांग –

वर्तमान में चल रहे अमेरिका-इजरायल और ईरान के युद्ध ने पूरे विश्व को प्रभावित कर रखा है। लेकिन फंड जारी करने का एकमात्र कारण यही नहीं कहा जा सकता है। इस दशक की शुरूआत से ही सरकार को कोविड, ऊर्जा और खाद्य संकट के अलावा टैरिफ वार से निपटना पड़ा है।

यद्यपि संरचनात्मक कदमों से घरेलू आर्थिक दबाव कम होते रहे हैं, लेकिन बाहरी झटकों के मामले बढ़े हैं। बेहतर कल्याणकारी योजनाओं तेजी से बढ़ी हैं। पूंजीगत व्यय ने अर्थव्यवस्था को ज्यादा मजबूत बनाया है। फिर भी यह अभी भी खाद्य पदार्थों, ऊर्जा और विनिर्माण इनपुट के लिए आयात पर निर्भर है।

वैश्विक उदाहरण –

स्थिरीकरण निधि का दुनिया भर में सफल रिकॉर्ड रहा है। भारत का अनुभव भी अच्छा होने की संभावना है। इससे रजाकोषीय अनुशासन को कम किए बिना या मैक्रोइकॉनॉमिक स्थिरता को खतरे में डाले बिना रिस्क कम होता है। बशर्ते कि इसका उपोग सही तरीके से किया जा सके।

‘द इकॉनॉमिक टाइम्स’ में प्रकाशित संपादकीय पर आधारित। 16 मार्च 2026