सॉफ्ट पावर और कौशल का केंद्र बने भारत
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‘सॉफ्ट पावर ही हमारी हार्ड पावर है।’ हाल ही में फैशन डिजाइनर-उद्यमी सब्यसाची मुखर्जी ने देश से संबंधित यह टिप्पणी की है। यह न केवल शिल्प और कारीगरी में हमारी प्रतिभा को रेखांकित करती है, बल्कि यह इसके माध्यम से देश की अर्थव्यवस्था को गति देने से भी जुड़ी हुई है।
कैसे –
- तेल और इस्पात, डिजिटल और दूरसंचार में हम जितनी ताकत लगा रहे हैं, उसी तरह उच्च गुणवत्ता, उच्च-मूल्य वाले लग्जरी उत्पादों के निर्माता के रूप में हम अपनी वैश्विक पहचान बना सकते हैं।
- कुछ उत्पादों और सेवाओं में भारत ऐसा स्थान और एकाधिकार बना सकता है, जिन्हें लोग उच्च टैरिफ की परवाह किए बिना भी खरीदेंगे।
- उच्च स्तरीय कारीगरी और शिल्प-कौशल में अपनी पारंपरिक शक्तियों का गहराई से उपयोग करके भारत ‘सॉफ्ट‘ उत्पादों की हार्डसेलिंग कर सकता है।
प्रधानमंत्री मोदी भी ‘वोकल फॉर लोकल’ का लगातार आह्वान कर रहे हैं। यह ऐसा मंत्र है, जो भारत को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ विशेष उत्पादों के निर्माता की पहचान दे सकता है।
‘द इकॉनॉमिक टाइम्स’ में प्रकाशित संपादकीय पर आधारित। 25 अगस्त, 2025
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