संसदीय स्थाई समिति की नवीकरणीय ऊर्जा पर रिपोर्ट

Afeias
10 Jan 2026
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भारत स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में तेजी से कदम बढ़ा रहा है। देश में कुल स्थापित बिजली क्षमता का 50% हिस्सा गैर जीवाश्म स्रोतों पर आधारित है। मजबूत नीतिगत समर्थन के कारण यह लक्ष्य समय से 5 वर्ष पहले ही हासिल कर लिया गया।

संसद की स्थाई समिति की ऊर्जा पर रिपोर्ट की चिंताजनक बातें –

  • नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य हासिल करने में अपर्याप्त दक्षता व निगरानी की कमी एक बाधा है। 129 गीगावाट स्थापित सौर क्षमता के बावजूद फोटोवोल्टिक संयंत्र के प्रदर्शन के आकलन के लिए एक राष्ट्रीय ढांचे का अभाव है।
  • माड्यूल की गुणवत्ता, क्षमता, संचालन और रखरखाव का मानकीकृत तरीका उपलब्ध नहीं है। इन मानकों के अभाव में शुल्कों से जुड़ी बोलियाँ दीर्घकालिक प्रदर्शन के साथ जुड़े जोखिम से तालमेल नहीं बिठा पाती।
  • प्रतिस्पर्धी बोली और कमजोर मार्जिन पर निर्भर इस क्षेत्र के लिए ऐसी जानकारियों का अभाव अक्षमता और वित्तीय दबाव का कारण बनता है।
  • वर्तमान में 5 गीगावाट की भंडारण क्षमता है 2030 तक 60 गीगॉवाट की भंडारण क्षमता होनी चाहिए।
  • दिन के समय अधिशेष और रात के समय कम बिजली उपलब्धता ने वितरण कंपनियों के लिए हालात मुश्किल बना दिए हैं।
  • प्रति मेगावाट क्षमता के लिए 4 से 7 एकड़ भूमि की आवश्यकता होती है। किन्तु हितों के टकराव, जमीन हासिल करने और संपर्क व्यवस्था से जुड़ी मंजूरी प्राप्त करने में देरी से परियोजना विकास धीमा पड़ता है।

संसदीय स्थाई समिति द्वारा सुझाए गए उपाय –

  • हरित ऊर्जा गलियारा बेहतर बनाने तथा पारेषण तंत्र मजबूत बनाने से संबंधित समिति की सिफारिशें तत्काल लागू की जानी चाहिए। हरित ऊर्जा के लिए लगने वाली बोलियों में 10% भंडारण घटक शामिल हो।
  • एकल मंजूरी व्यवस्था हो, जिससे हितों के टकराव न हो।
  • बाधाओं की पहचान करने और नुकसान रोकने के लिए राज्यों और परियोजना विकासकर्ताओं के बेहतर समन्वय की आवश्यकता है।
  • हमारी विनिर्माण रणनीति सिर्फ माड्यूल तक सीमित न हो। समिति ने सरकार को पालीसिलिकॉन, इंगट एवं वेफर और सौर ग्लास के लिए समर्थन बढ़ाने का सुझाव दिया है। ताकि इनका आयात न करना पड़े।

हमें सौर ऊर्जा की क्षमता बढ़ाने से ज्यादा उसकी दक्षता पर ध्यान देने की आवश्यकता है।

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