रुपये के अंतरराष्ट्रीयकरण की ओर निरंतर बढ़ते कदम

Afeias
21 Mar 2026
A+ A-

To Download Click Here.

भारतीय रिजर्व बैंक के मासिक बुलेटिन में जनवरी 2026 से देश के कुल निर्यात और आयात की रुपये में बिलिंग और निपटान से संबंधित दो सारणियाँ शामिल की जाने लगी हैं। अंतरर्राष्ट्रीय व्यापार का 5% हिस्सा ही रुपये में तय होता है।

फरवरी 2022 में यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के बाद अमेरिका ने रूस की सभी डॉलर संपत्तियों को फ्रीज कर दिया तथा स्विफ्ट प्रणाली के प्रयोग पर भी रोक लगा दी। स्विफ्ट का उपयोग 200 देशों में वित्तीय संस्थान अंतरर्राष्ट्रीय धन और प्रतिभूति अंतरण हेतु निर्देश भेजने के लिए किया जाता है। इसीलिए अन्य देशों के साथ भारत ने भी डॉलर प्रधान भुगतान प्रणाली के विकल्प खोजने शुरू कर दिए हैं। आरबीआई ने इसी को ध्यान में रखते हुए अंतर विभागीय समूह का गठन किया।

अंतर-विभागीय समूह (आई.डी.जी.) की रिपोर्ट –

  • वैश्विक व्यवस्था के पुर्नसंतुलन के साथ आत्मनिर्भरता पर ध्यान केंद्रित करना आवश्यक है। हमारे प्रधानमंत्री ने भी रुपये की विश्वभर में सुलभ स्वीकार्यता की बात कही है।
  • व्यापारिक साझेदारों के साथ स्थानीय मुद्रा में लेन-देन की व्यवस्था की जाए। ताकि बिल, भुगतान और निपटान रुपये या व्यापारिक साझेदार की मुद्रा में किए जा सकें। इससे जोखिम सीमित होंगे।
  • भारतीय बैंकों को विदेशी शाखाओं के माध्यम से भारत के बाहर रुपये में बैंकिंग सेवाएँ उपलब्ध कराई जाए।

रुपये के अंतरर्राष्ट्रीयकरण के लिए उठाए गए कदम –

  • कुछ मुद्राएँ; जो अत्यधिक स्थिर, तरल और सार्वभौमिक रूप से स्वीकृत होती हैं, उन्हें सुरक्षित निवेश माना जाता है; जैसे डॉलर, यूरो, जापानी येन, ब्रिटिश पाउंड स्टार्लिंग, स्विस फ्रैंक, कैनेडियन, आस्ट्रेलियाई और न्यूजीलैंड डॉलर।
  • सिंगापुर और हांगकांग डॉलर तथा स्वीडिश क्रोना द्वितीय स्तर की मजबूत मुद्राएँ हैं। हमें अपने डॉलर रिजर्व को इन मुद्राओं में डाइवर्सिफाई करना चाहिए।
  • 2023 में आरबीआई ने संयुक्त अरब अमीरात, इंडोनेशिया, मालदीव और मारीशस के केंद्रीय बैंकों के साथ स्थानीय मुद्रा व्यवस्था पर समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। कई अन्य केंद्रीय बैंकों से बात चल रही है।
  • जर्मनी और ब्रिटेन जैसे विकसित देशों के बैंकों सहित 35 देशों के 83 बैंकों ने भारतीय बैंकों में विशेष खातें खोले हैं, ताकि स्थानीय मुद्रा में व्यापार हो सके।
  • भारतीय निर्यातकों ने सिफारिश की है कि निर्यात का बिल रुपये में बने या डॉलर में, भारतीय निर्यातकों को समान प्रोत्साहन दिए जाने चाहिए। सरकार ने ऐसा ही किया है।
  • वित्त वर्ष 2025-26 के 9 माह के बीच भारत से वस्तुओं और साफ्टवेयर के निर्यात का 6.08% तथा आयात का 4.82% रुपये में बिल किया गया।
  • 2024 में जे.पी. मार्गन इमर्जिंग मार्केट लोकल करेंसी इंडेक्स में भारतीय सरकारी बांड को शामिल किया गया है। बाद में इन्हें ब्लूमबर्ग इमर्जिंग मार्केट लोकल करेंसी बांड इंडेक्स और एफटीएसई रसेल इमर्जिंग मार्केट इंडेक्स में शामिल किया गया।
  • अनिवासी भारतीय रुपये और अन्य मुद्राओं में लेनदेन कर सकें, इसके लिए आरबीआई द्वारा नेपाल, भूटान और श्रीलंका में रहने वाले एनआइआई को भारतीय बैंकों की विदेशी शाखाओं से ऋण लेने की अनुमति है।

रुपये के अंतरर्राष्ट्ररीयकरण के लिए भविष्य की राह –

  • अगर डिडालराइजेशन के कारण भारत को भी स्विफ्ट प्रणाली से बाहर किया जाता है, तो इससे निपटने का एकमात्र तरीका भारतीय भुगतान प्रणाली; जैसे कि आरटीजीएस (रियल टाइम ग्रास सेटलमेंट) तथा एसएफएमएस (स्ट्रक्चर्ड फाइनैशियल मैसेजिंग सिस्टम) को अन्य देशों की भुगतान प्रणालियों से सीधे जोड़ना है। इस दिशा में काम जारी है।
  • विनिमय दर में अस्थिरता बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। पर इसके लिए हमें रुपये के अंतरर्राष्ट्रीकरण के लिए एक साथ बड़े बदलाव करने के बजाय क्रमिक दृष्टिकोण अपनाना होगा। जैसे स्थानीय मुद्रा का प्रयोग पहले व्यापार फिर गैर-व्यापारिक लेन-देन फिर अंत में पूंजी खाता लेनेदेन के लिए किया जा सकता है।
  • रुपये का अंतरर्राष्ट्रीयकरण एक धीमी और स्थिर प्रक्रिया होनी चाहिए। 2047 तक विकसित भारत के लिए रुपये की परिवर्तनीयता और आरक्षित मुद्राओं में स्थान प्राप्त करने का लक्ष्य भी रखना चाहिए।

*****