पाठ्यपुस्तक में अपनी छवि को लेकर नाराज न्यायपालिका
To Download Click Here.

हाल ही में उच्चतम न्यायालय ने एनसीईआरटी की कक्षा 8 की पुस्तकों में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के जिक्र को लेकर नाराजगी दिखाई है। सरकार ने इस पर पछतावा जताया है, और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है।
जब से बीजेपी सत्ता में आई है, स्कूल और कॉलेज के पाठ्यक्रम में बदलाव के एजेंडे को लेकर चल रही है। दूसरी ओर, दक्षिणपंथी विचारधारा के लोग उच्चतम न्यायालय के हिंदू विरोधी और पर्यावरण की रक्षा के लिए विकास विरोधी निर्णयों की आलोचना करते रहे हैं। हाल ही में प्रधानमंत्री के एक सलाहकार ने न्यायपालिका को विकास की राह में सबसे बड़ा रोड़ा बताया है।
न्यायपालिका ने सरकार के रुख को देखते हुए पाठ्यपुस्तकों में न्यायिक भ्रष्टाचार की बात को धमकाने जैसा कदम मान लिया है। वास्तव में तो यह सामान्य रूप से सरकार या पॉलिटिकल एग्जीक्यूटिव वाले अध्याय में भी लिखा गया है। चुनाव वाले अध्याय में एक उम्मीदवाद की कार में मिले करेंसी नोटों की तस्वीर थी।
वास्तविकता अलग –
पाठ्यपुस्तक लिखने वालों का उद्देश्य शायद बच्चों और युवाओं में देश के तंत्र के प्रति आलोचनात्मक जागरूकता (क्रिटिकल अवेयरनेस) जगाना था। आज की पीढ़ी को नागरिकशास्त्र के उबाऊ सिद्धांतों में कोई रूचि नहीं है। इसे देखते हुए ही अध्यायों को वास्तविकता से जोड़ा गया है। गौर करने वाली बात यह है कि इतिहास के कुछ अध्यायों में मध्यकालीन हिंदू राज्यों की बिन बात प्रशंसा की गई है, और मुस्लिम शासकों के अध्यायों में नकारात्मकता अधिक भरी गई है।
समस्या यह नहीं है कि न्यायपालिका को खास तौर पर लक्ष्य बनाया गया है। बल्कि यह कि न्यायपालिका पाठ्यपुस्तक के कुछ विशेष हिस्से को लक्ष्य बना रही है।
‘द हिंदू’ में प्रकाशित संपादकीय पर आधारित। 2 मार्च 2026