पटाखा इकाइयों में लापरवाही
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देश की अधिकांश पटाखा फैक्टरी दक्षिणी राज्यों में हैं। इन इकाईयों में आए दिन हादसे होते रहते हैं। हाल ही में तमिलनाडु के दक्षिणी विरुद्युनगर जिले में एक पटाखा यूनिट में धमाका होने से 25 मजदूर मारे गए। पिछले चार सालों में इस जिले में ऐसे धमाकों में कम-से-कम 134 लोग मारे गए हैं और कई घायल हुए हैं।
ऐसी घटनाओं पर कुछ बिन्दु –
- पटाखा उद्योग खतरनाक है और सुरक्षा नियमों की कोई भी लापरवाही तबाही ला सकती है।
- सुपरविजन करने वाले अधिकारियों की लापरवाही से यहाँ कानूनों को ठीक से लागू ही नहीं किया जाता है। यह बिना अनुमति के चल रही थी।
- पटाखा ईकाई में एक समय में केवल 12 लोगों को काम करने की अनुमति है, लेकिन हादसे के समय यहाँ 40 लोग काम कर रहे थे।
- इस क्षेत्र की निरीक्षण टीम में लोगों की कमी की खबर है। अत: पूरा अंदेशा है कि निरीक्षण के नाम पर रस्म पूरी की गई होगी।
- पटाखों से जुड़ी सभी इकाईयों की समस्याएं लगभग एक सी हैं – बिना लाइसेंस यूनिट चलाना तथा इनमें सुरक्षा उपायों को नजरअंदाज आदि। इनकी निगरानी बढ़ाई जानी चाहिए।
- ये पटाखा ईकाई इस क्षेत्र की आर्थिक जीवन रेखा भी हैं। ये उन क्षेत्रों में हैं, जहाँ सूखा रहता है, और सिंचाई के लिए बारिश पर निर्भर रहना पड़ता है। कड़ी निगरानी के नाम पर सही तरीके से काम करने वाली इकाइयों को परेशान नहीं किया जाना चाहिए। केन्द्र और राज्य स्तर पर अधिकारियों को पटाखा उद्योग के खतरों को कम करने के लिए सही तरीके से काम करना चाहिए।
‘द हिन्दू’ में प्रकाशित 21/04/2026 के संपादकीय पर आधारित