पश्चिमी घाट को जीने दें

Afeias
23 Jan 2026
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पूरी दुनिया के लिए जैव विविधता के महत्व पर आए दिन सम्मेलन होते हैं। लेख प्रकाशित किए जाते हैं, चर्चाएं होती हैं। लेकिन हमारे ज्यादातर नेता और डेवलपर ऐसे हैं, जो वैज्ञानिक तथ्यों की अनदेखी करते हुए जंगलों, पहाड़ियों, दलदलों और नदियों आदि को बर्बाद करने पर तुले हुए हैं। उनके लिए संरक्षण का अर्थ ‘विकास-विरोधी‘ और ‘जन-विरोधी‘ होता है। वायनाड में हुई प्राकृतिक तबाही ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि संरक्षण के बिना बेरहमी से किया गया विकास लोगों का विरोधी है।

दरअसल, जैव विविधता का कोई विकल्प नहीं है। यह वह मूल तत्व है, जो धरती पर सभी छोटे-बड़े जीवों के लिए जीवन को धारणीय बनाती है। इसके अलग-अलग आवास और प्रजातियां 1600 कि.मी. में फैले पश्चिमी घाट में मिलती हैं। लगभग हर वर्ष, किसी चट्टान के नीचे या दलदल में, कोई नई प्रजाति खोजी जाती है। पश्चिमी घाट में इन जीवों के आवास ऊँचाइयों के साथ बदलते हैं। वर्षा वन से घास के मैदान और फिर पहाड़; इसकी ऐसी विविधताएं हैं, जिन्हें कम करके नहीं आंका जा सकता है। यह क्षेत्र पारिस्थितिकी का हॉट स्पॉट है। फिर भी इंसानों से इसे खतरा है। इस खतरे को दूर करना राजनीतिक नेतृत्व और स्थानीय जनता का काम है।

‘द टाइम्स ऑफ इंडियामें प्रकाशित संपादकीय पर आधारित। 10 जनवरी 2026