नारी सशक्तिकरण का स्रोत उज्‍ज्‍वला

Afeias
23 May 2026
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प्रधानमंत्री उज्‍ज्‍वला योजना के 10 वर्ष पूरे हो चुके हैं। यह भारत के विकास संबंधी दृष्टिकोण में आए बड़े परिवर्तन का जीवंत प्रमाण है। प्रधानमंत्री के द्वारा 2016 में बलिया से इस योजना की शुरुआत की गई थी।

इस योजना के केन्‍द्र में हाशिये पर मौजूद वे महिलाएं हैं, जो दशकों से धुएं में अपना स्‍वास्‍थ्‍य व सपने गवा रही थीं। ग्रामीण महिलाओं के जीवन की सहजता राष्‍ट्रीय उन्‍नति का ठोस आधार है। यह योजना ‘सबका साथ-सबका विश्‍वास’ के मंत्र के साथ स्‍वच्‍छ रसोई ऊर्जा का सबसे बड़ा अभियान है।

स्‍वच्‍छ ईंधन से जुड़े कुछ आंकड़े –

  • अप्रैल 2015 तक भारत में एलपीजी का दायरा 56.2 परिवारों तक ही सीमित था। राष्‍ट्रीय परिवार स्‍वास्‍थ्‍य सर्वेक्षण-4 के अनुसार 44% परिवार ही स्‍वच्‍छ ईंधन उपयोग कर पा रहे थे।
  • उज्‍ज्‍वला योजना के तहत 2019 तक 8 करोड़ एलपीजी कनेक्‍शन दिए गए। उज्‍ज्‍वला 2.0 ने स्‍थाई पता न रखने वाले प्रवासियों को भी कनेक्‍शन दिए। इससे इनकी संख्‍या 10.56 करोड़ हो गई।
  • 2014 में जो गैस कनेक्‍शन 14.52 करोड़ थे, वे 2024 में 32.83 करोड़ हो गए।
  • गैस वितरकों की संख्‍या लगभग दोगुनी हो गई, जो ज्‍यादातर दूरदराज के क्षेत्रों में है। 

प्रधानमंत्री उज्‍ज्‍वला योजना से होने वाले लाभ –

  • यह योयजना एक प्रभावशाली जनकल्‍याणकारी योजना है। इसमें जनधन-आधार-मोबाइल की तिकड़ी ने प्रमुख भूमिका निभाई। इससे सब्सिडी का पैसा सीधे खाते में पहुँचने लगा तथा बीच के रिसाव दूर हो गए।
  • इससे महिलाएँ न सिर्फ चूल्‍हे के धुएँ से आजाद हुईं, बल्कि एक मूक स्‍वास्‍थ्‍य क्रांति के तहत वे श्‍वसन संबंधी तथा धुएँ से होने वाली अन्‍य बीमारियों से मुक्‍त हो सकीं।
  • महिलाएँ ईंधन इकठ्ठा करने वाले तथा खाना बनाने में लगने वाले अतिरिक्‍त समय का उपयोग आर्थिक गतिविधियों में कर रही हैं। वे स्‍वयं सहायता समूहों से जुड़ कर छोटे व्‍यवसाय शुरु कर रही हैं।
  • लड़कियों की शिक्षा व उनके भविष्‍य पर भी सकारात्‍मक प्रभाव डालने में यह योजना सफल हुई है।
  • सरकार इस योजना पर ध्‍यान दे रही है। 2019-20 में औसतन 3 सिलेंडरों की खपत थी, जो 2025-26 में 5 सिलेंडर हो गई। छोटे सिलेंडरों द्वारा भी यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि अधिक लागत बाधा न बने।
  • उज्‍ज्‍वला योजना नारी सशक्तिकरण को सिर्फ नीतिगत नारे में नहीं बल्कि जमीनी स्‍तर पर प्रमाणित करती है। यह इस बात का भी प्रमाण है कि जब नीतियाँ संवेदनशीलता के साथ बनती हैं, तो कैसे करोड़ों जिंदगियाँ बदलती हैं।

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