मुंबई की जल निकासी क्षमता में सुधार हो
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बारिश के दिनों में महानगरों में पानी जमा होने की घटनाएं बढ़ती ही जा रही हैं। इनमें भी मुंबई का हाल कुछ ज्यादा ही खराब है। यहां होने वाली बारिश की तुलना में जल निकासी क्षमता बहुत कम है।
कुछ तथ्य –
- 1860 के दशक में, मुंबई की तूफानी जल निकासी क्षमता को 14 इंच या 356 मिमी. प्रतिदिन तक बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया था।
- 2005 की बाढ़ के बाद शहर की जल निकासी क्षमता 25 मिमी. प्रतिघंटे से दोगुनी होकर 55 मिमी. प्रति घंटा हो गई है। यह भी अपर्याप्त सिद्ध हो रही है। निचले इलाकों में इसे कम से कम 120 मिमी. प्रति घंटे तक बढ़ाने की आवश्यकता है।
- जलवायु परिवर्तन ने मुंबई में भारी बारिश के दिन बढ़ा दिए हैं। फिर भी यह ऐसा नहीं है, जिसे संभाला न जा सके। गत वर्ष, 21 बार 100 मिमी. से अधिक वर्षा दर्ज की गई थी। इसे प्रबंधनीय होना चाहिए।
- शहर में जल जमाव का एक बड़ा कारण अतिक्रमण है। इसी कारण से मूसलाधार वर्षा के होते ही उपनगरीय रेलवे ट्रैक पर पानी भर जाता है, और ट्रैन सेवाएं रुक जाती हैं। फिर यात्री सड़कों का आश्रय लेते हैं, जो जाम हो जाती हैं।
मुंबई की बारिश को टाला तो नहीं जा सकता, लेकिन जल-निकासी व्यवस्था को दुरूस्त जरूर रखा जा सकता है।
‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ में प्रकाशित संपादकीय पर आधारित। 22 अगस्त, 2025
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