मानव स्वास्थ्य के लिए घातक बनती स्नैकिंग
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चिप्स और कोला या दूसरी तरह के स्नैकिंग से जुड़ी लैंसेट की सर्वे रिपोर्ट बनाती है कि लोगों के स्वास्थ्य को बचाने के लिए इस तरह के खाद्य पदार्थों पर नियंत्रण लगाना कितना जरूरी है।
कुछ बिंदु –
- लैंसेट में छपे इस पेपर की सीरीज स्नैकिंग पर दो दृष्टिकोण से देखती है। पहला, किस तरह से अल्ट्रा प्रासेस्ड भोज्य पदार्थों ने आसान विकल्प देकर इंसान की स्वस्थ भोजन की आदत को बदल दिया है। दूसरे, सिर्फ एक समन्वित नीति ही ऐसा वातावरण तैयार कर सकती है, जिसमें स्वस्थ भोजन की आदत को मजबूत बनाया जा सकता है।
- अध्ययन में इस हेतु सरकारी नीति को सही दिशा में मोड़ने की बात भी कही गई है। इसमें पैकेट पर चेतावनी, बच्चों से जुड़े खाद्य पदार्थों की मार्केटिंग पर रोक, टैक्स और वित्तीय रणनीति तैयार करने का विकल्प सुझाया गया है।
इसमें सरकारी नीति में बदलाव पर इतना जोर इसलिए दिया गया है, क्योंकि ये प्रसंस्कृत चीजें लत लगाने वाली होती हैं। ये मानवीय संरचना को समझ-बूझकर बनाई जाती हैं। साथ ही भागती-दौड़ती जिंदगी में लोगों को आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं।
- अस्वास्थ्यकर स्नैकिंग ने भूख और पेट भरने के लिए शरीर के नैचुरल सिग्नल को बिगाड़ दिया है। अतः लोगों में भी इसके नुकसान से जुड़ी जागरूकता फैलाई जानी चाहिए। व्यक्तिगत अनुशासन से बहुत कुछ प्राप्त किया जा सकता है।
‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ में प्रकाशित संपादकीय पर आधाारित। 21 नवंबर, 2025
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