दक्षिण अमेरिका के साथ बढ़ते भारत के व्यापार संबंध
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भारत-दक्षिण अमेरिका व्यापार लगातार बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री की हाल में संपन्न हुई इस क्षेत्र की यात्रा से संभावनाएं बहुत बढ़ गई हैं। ब्राजील और अर्जेंटीना इस महाद्वीप में भारत की संभावित धूरी के महत्वपूर्ण आधार बन सकते हैं।
कुछ बिंदु –
- भारत का मर्कोसुर ब्लॉक के साथ एक अधिमान्य या प्रीफरेन्शियल व्यापार समझौता (पीटीए) है। इसमें ब्राजील, अर्जेंटीना, उरूग्वे, पैराग्वे और बोलीविया शामिल हैं।
- इस समझौते को मुक्त व्यापार समझौते तक ले जाने का लक्ष्य है। वित्त वर्ष 2025 में लैटिन अमेरिका को भारत का निर्यात केवल 15.17 अरब डॉलर रहा है। यह इस क्षेत्र के कुल आयात का 2% से भी कम है।
- दक्षिण अमेरिका प्राकृतिक संसाधनों का एक केंद्र है। वहाँ तेल, गैस, तांबा, लिथियम, दुर्लभ मृदा आदि के विशाल भंडार हैं। ये भारत के औद्योगिक विकास को बढ़ा सकते हैं। इलेक्ट्रिक वाहन बैटरी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में गति मिल सकती है। खाद्य सुरक्षा मजबूत हो सकती है।
- भारत को अपने कूटनीतिक दायरे का विस्तार करके व्यापार को आगे बढ़ाना चाहिए। वियतनाम की नीति पर चलकर संरक्षणवादी रवैया छोड़ना चाहिए। वियतनाम ने हाल ही में 20 मुक्त व्यापार समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। दूसरे, चीन की लैटिन अमेरिका में पहले से ही बड़ी उपस्थिति है। इसलिए लैटिन अमेरिका भी संतुलन बनाना चाहता है, और उसके लिए भी भारत एक अच्छा विकल्प है।
‘द टाइम्स ऑफ इंडिया‘ में प्रकाशित 07 जुलाई, 2025 के संपादकीय पर आधारित।
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