भारत की खदानों की समस्याएं गहरी और संरचनात्मक

Afeias
18 Dec 2025
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देश की खदानों में दुर्घटनाएं होती रही हैं। हाल ही में सोनभद्र के ओबरा में एक पत्थर की खदान गिरने से लगभग एक दर्जन मजदूर दब गए। राज्य सरकार ने खदान के सेफ्टी प्रोटोकॉल की जांच के आदेश दे दिए हैं। लेकिन खदानों की समस्याएं इससे ज्यादा गहरी और संरचनात्मक हैं।

कुछ बिंदु –

  • बड़े पैमाने पर गैर-कानूनी खदानें होना।
  • पत्थर की खदानें माइनिंग का सबसे निचला स्तर हैं। ये सेफ्टी या सुरक्षा को लेकर सबसे कम जागरूक होती हैं। इन खदानों के कांट्रैक्टर अक्सर छोटे-मोटे ऑपरेटर होते हैं। इन खदानों में कटिंग की योजना के लिए माइक्रो भू-वैज्ञानिक अध्ययन की जरूरत होती है। सरकार ब्लॉक लीज पर देने से पहले बड़े पैमाने पर सामान्य भू-वैज्ञानिक अध्ययन कर लेती है। इसका सूक्ष्म अध्ययन शायद ही कोई कॉन्ट्रैक्टर करता है। जबकि पहाड़ी ढलानों पर कमजोर जोड़ों, और फ्रैक्चर लाइनों का साफ पता लगाया जाना चाहिए।
  • ब्लास्टिंग डिजाइन एक विज्ञान है। यह जरूरी विस्फोटक के आकार और थ्रो का सही अंदाजा लगाता है। लेकिन इसका निर्णय भी अक्सर आमतौर पर ले लिया जाता है।

ओबरा खदान के गिरने की जांच करने वालों को पता लगाना होगा कि खदानों के लिए आधारभूत तरीकों का कितना पालन किया गया था। हैरानी इस बात की है कि आईआईटी धनबाद में भारतीय खनन विज्ञान का गढ़ है। लेकिन खनन में शायद ही कभी इस संस्थान को महत्व दिया जाता है।

‘द हिंदूमें प्रकाशित संपादकीय पर आधारित। 19 नवंबर, 2025