भारत के पर्यटन-विकास से जुड़ी कुछ जरूरी बातें
To Download Click Here.

कुछ तथ्य –
भारत विविधताओं का देश है। यहाँ पर्यटन के विकास की अनेक संभावनाएं हैं, फिर भी 2025 में यहाँ 60 से 70 लाख विदेशी पर्यटक ही पहुँचे। दिल्ली से कम आबादी वाले सिंगापुर में एक करोड़ से ज्यादा पर्यटक पहुँचे हैं। थाईलैंण्ड ने पर्यटन से 60 अरब डॉलर कमाए हैं, जबकि भारत ने इसका एक तिहाई ही कमाया होगा।
इन सबका कारण पर्यटन रणनीति की कमी हो सकती है। यह एक ऐसा क्षेत्र है, जहाँ तुरंत ध्यान देने की जरूरत है।
पर्यटन से जुड़ी तीन बड़ी कमियां –
- विदेशों में भारत की छवि – ‘इनक्रेडिबल इंडिया’ एक बहुत ही सशक्त नारा है, लेकिन केवल ब्रांडिंग से नकारात्मक छवि को कम नहीं किया जा सकता। पर्यटकों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं, धोखाधड़ी, सफाई और नौकरशाही के धीमे एक्शन अक्सर हमारी सांस्कृतिक विरासत से ज्यादा जल्दी प्रचार पा जाते हैं।
- बुनियादी ढांचा – भारतीय भूमि पर कदम रखते ही पर्यटक का अनुभव शुरू हो जाता है। एयरपोर्ट, इमिग्रेशन, टैक्सी, वाई-फाई पहले अनुभव होते हैं। सड़कों का रखरखाव, सही और बहुभाषी साइन बोर्ड, साफ शौचालय, भरोसेमंद इंटरनेट तथा संपर्क-साधन बहुत ही बुनियादी सुविधांए हैं, जिनका होना जरूरी है।
- भारत की अपनी समस्याएं – भीड़, शोर, स्कैमर, दलाल, भिखारी, यौन-अपराधी और एक ऐसी संस्कृति; जो हमेशा पर्यटको के अनुकूल नहीं होती है। इससे लोगों का भरोसा खत्म होता है। रिपोर्ट के अनुसार, आतिथ्य उद्योग में प्रशिक्षित स्टाफ की 40% कमी है। इसके लिए हमें प्रोफेशनल कार्यबल चाहिए।
फिलहाल भारत अभी ‘ईज-ऑफ-ट्रैवल सूचकांक’ पर कई एशियाई देशों से पीछे है।
समाधान क्या हो सकते हैं –
- घाटे को ठीक करना – इसके लिए विचार-दृष्टि और वास्तविकता को ठीक किया जाना चाहिए।
- रीब्रांड और रीलॉन्च – थीम विशेष को लेकर योजना बनाई जानी चाहिए; जैसे- हिमालयन ट्रेल, प्राकृतिक टूर आदि।
- डिजिटल स्टोरीटेलिंग में निवेश किया जाना चाहिए। वर्चुअल टूर, इंफ्लुएंसर पार्टनरशिप और यूजर जेनरेटेड कंटेट बनाए जाने चाहिए।
- बुनियादी ढांचे को बेहतर और सुरक्षित बनाने के लिए पब्लिक प्राइवेट साझेदारी को बढ़ावा दें। ‘एडॉप्ट ए हेरिटेज’ योजना शुरू हो चुकी है। इसमें तेजी लाई जानी चाहिए। बेहतर संपर्क के लिए परिवहन में सुधार होना चाहिए।
- सुरक्षा और ट्रेनिंग को प्राथमिकता देना चाहिए। गाइड ऐसे हों, जो पर्यटकों को सही और समग्र जानकारी दे सकें। बहुभाषियों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए।
- वीजा प्रक्रिया को तेज और आसान बनाया जाना चाहिए। मल्टी-एंट्री वीजा पर भी विचार होना चाहिए। वीजा ऑन अरावइल फॉर द वर्ल्ड नीति पर विचार किया जाना चाहिए। प्रवासन अधिकारियों को व्यवहार कुशल बनाने की जरूरत है।
- धारणीयता के लिए इको-टूरिज्म और अच्छे अनुभव को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
पर्यटन न सिर्फ कुशल बल्कि अर्द्ध-कुशल और अकुशल लोगों को भी नौकरी देता है। इसके माध्यम से हम अपने बेकार हो रहे युवाओं को आर्थिक अवसर दे सकते हैं।
‘द हिंदू’ में प्रकाशित शशि थरूर के लेख पर आधारित। 29 जनवरी 2026