भारत – इजराइल संबंधों का बहुत अच्छा दौर
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अमेरिका-इजराइल और ईरान युद्ध शुरु होने के ठीक पहले प्रधानमंत्री मोदी ने इजराइल की यात्रा की थी। यह 2017 के बाद से उनकी दूसरी इजराइल यात्रा थी। इस बीच दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच न केवल व्यापार, बल्कि उससे बढ़कर मित्रतापूर्ण संबंध देखने को मिले हैं। इससे ऐसा लगता है कि दोनों पक्ष एक-दूसरे पर गहरा भरोसा करने लगे हैं।
इस यात्रा के कुछ महत्वपूर्ण बिंदु हैं –
- जब मोदी पहली बार इजराइल गए थे, तब नेतन्याहू ने दोनों देशों के रिश्ते को आई टू टी टू जैसे गणितीय इक्वेशन के तौर पर बताया था। यह इंडियन टेलैंट + इजराइल टेक की ओर संकेत करता है।
- पश्चिम एशिया में चीन को रोकने के लिए भारत, इजराइल, अमेरिका और यूएई ने आईटूयूटू नामक एक समूह पहले ही बना रखा है।
- फिलहाल ये दोनों देश आपसी सहयोग से लेकर जल सुधार, शिक्षा और स्पेस तकनीक में बढ़-चढ़कर भाग ले रहे हैं।
- भारत अब एशिया में इजराइल का दूसरा बड़ा व्यापार साझेदार है।
- भारत इजराइल का सबसे बड़ा हथियार खरीदार भी है।
- हालांकि इजराइल एक छोटा देश है, लेकिन ग्लोबल इनोवेशन के 139 देशों की सूची में यह 14वें स्थान पर है। यह अनुसंधान पर भारत के 0.7% की तुलना में 6% से ज्यादा खर्च करता है। चिप बनाने और रक्षा उत्पादों में यह भारत की बहुत मदद कर सकता है। युद्ध में मानवरहित हवाई वाहनों के बढ़ते उपयोग में भी यह भारत को तकनीकी सहायता दे सकता है।
कुल मिलाकर, वैश्विक जगत में इस यात्रा को दो पहलुओं से देखा जा सकता है। पहला, भारत-इजराइल-यूएई और आईटूयूटू समूहों की गतिविधि में नई तेजी आ सकती है। इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर के बढ़ने की संभावना है। दूसरे, पश्चिम एशियाई ताकतों के लिए यह भारत-विरोधी हो सकता है। अगर ऐसा होता है, तो भारत को इसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है।
विभिन्न समाचार पत्रों पर आधारित। 27 फरवरी 2026