अमरावती को आंध्रप्रदेश की राजधानी बनाने के लिए केंद्रीय कानून
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हाल ही में केंद्र सरकार ने अमरावती को आंध्रप्रदेश की राजधानी घोषित कर दिया है। सरकार के अनुसार 2 जून 2024 से इसे लागू माना जाएगा। आंध्र प्रदेश री ऑर्गेनाइजेशन एक्ट 2014 में बदलाव करके ऐसा किया गया है। एक्ट के तहत हैदराबाद को 10 वर्षों के लिए तेलंगाना और आंध्रप्रदेश दोनों की राजधानी बनाया गया था। इस कानून का उद्देश्य अमरावती को एक केंद्रीय कानून के तहत लाना है, ताकि आने वाली राज्य सरकारें राजधानी से जुड़े निर्णयों में छेड़छाड़ न कर सकें।
इससे जुड़ें विवाद पर कुछ बिंदु –
- मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने अमरावती को एक ग्रीनफील्ड राजधानी के तौर पर देखा था, और 2014 की शुरूआत में इस विचार को आकार देना शुरू कर दिया था।
- 2019 में वाईएसआर पार्टी के मुख्यमंत्री जगन रेड्डी ने तीन राजधानी शहरों का विचार रखते हुए अमरावती का विकास रोक दिया था।
- अमरावती पर खर्च को लेकर जगन रेड्डी का तर्क है कि यह उत्तर तटीय जिलों और सूखे से जूझ रहे रायल सीमा इलाके के लिए नुकसानदायक होगा।
- क्षेत्र के किसान भी अमरावती में कंपनियों को जमीन देने का विरोध करते रहे हैं।
वहीं राजधानी को तीन हिस्सों में बांटने के निर्णय से सरकारी खजाने को हुए वित्तीय नुकसान का आरोप लगाया जा रहा है।
इन विवादों को खत्म करने के लिए ही आंध्र की मिली जुली सरकार ने एपीआरए या रीऑर्गेनाइजेशन एक्ट की धारा 5(2) में बदलाव करके, संसद में इस हेतु विधेयक प्रस्तुत किया था।
‘द हिंदू’ में प्रकाशित वी राघवेंद्र के लेख पर आधारित। 07 जनवरी 2026