एआई में कैसे आगे बढ़े भारत

Afeias
09 Jul 2026
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भारत एआई प्रतिभा और स्टार्टअप्स के मामले में दुनिया के अग्रणी देशों में है। लेकिन वैश्विक निवेश और बड़े पैमाने की महत्वाकांक्षा की कमी के कारण वह अमेरिका और चीन से पीछे रह सकता है।

कुछ बिंदु –

  • हाल ही में भारतीय एआई स्टार्टअप सर्वम एआई ने 23.4 करोड़ डॉलर जुटाकर यूनिकॉर्न का दर्जा प्राप्त किया। लेकिन इसकी वैल्यूएशन अभी भी अमेरिकी एआई कंपनियों की तुलना में काफी कम है।

संप्रभु एआई क्या है ?

संप्रभु एआई (Sovereign AI) का अर्थ है कि कोई देश अपनी एआई क्षमताओं का विकास, संचालन और नियमन स्वयं करे।

इसमें शामिल हैं – स्थानीय डेटा पर प्रशिक्षित एआई मॉडल, घरेलू कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, डेटा सुरक्षा और गोपनीयता, स्थानीय भाषाओं और संस्कृति का संरक्षण तथा विदेशी एआई प्लेटफॉर्म पर निर्भरता में कमी।

उदाहरण –

यदि भारत केवल अमेरिकी एआई मॉडल का उपयोग करता है, तो डेटा नियंत्रण विदेशों के पास रहेगा। आर्थिक लाभ बाहर जाएगा। साथ ही भारतीय भाषाओं और सामाजिक संदर्भों की उपेक्षा होगी ।

भारत और यूरोपीय यूनियन की साझेदारी क्यों महत्वपूर्ण?

यूरोपीय यूनियन और भारत के हित कई मामलों में समान हैं। भारत के पास तकनीकी प्रतिभा, विशाल डेटा और एआई मॉडल विकसित करने की क्षमता है। जबकि यूरोपीय यूनियन के पास पूंजी और बाजार, मजबूत नियामक ढांचा और एआई पर अत्यधिक अमेरिकी निर्भरता की चिंता है।

संभावित लाभ

  • एआई अनुसंधान में संयुक्त निवेश
  • सुरक्षित और नैतिक एआई मॉडल
  • ओपन-सोर्स एआई पारिस्थितिकी तंत्र
  • अमेरिकी और चीनी तकनीकी प्रभुत्व का विकल्प

भारत के सामने चुनौतियाँ –

  1. पूंजी की कमी –

फाउंडेशन मॉडल बनाने में अरबों डॉलर लगते हैं।

  1. कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर –
  • ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट (GPU) की कमी
  • उच्च लागत
  • चिप आयात पर निर्भरता।
  1. वैश्विक ब्रांडिंग –

भारतीय एआई कंपनियाँ तकनीकी रूप से सक्षम हैं। लेकिन इनकी अंतरराष्ट्रीय पहचान सीमित है।

  1. अनुसंधान एवं नवाचार –

अधिकांश भारतीय एआई कंपनियाँ अभी अनुप्रयोग (Applications) बना रही हैं, जबकि फाउंडेशन मॉडल विकसित करने वाली कंपनियाँ कम हैं।

भारत के अवसर –

  1. भारतीय भाषाओं में एआई –

भारत में 22 अनुसूचित भाषाएँ और सैकड़ों बोलियाँ हैं। इसलिए स्थानीय भाषा आधारित एआई मॉडल विकसित करने में भारत की विशेष बढ़त है।

  1. विशाल डेटा संसाधन –

यूपीआई (UPI), आधार, डिजीलॉकर, ओएनडीसी (ONDC) जैसे डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचनाएँ (DPI) एआई विकास के लिए महत्वपूर्ण आधार प्रदान करते हैं।

  1. वैश्विक दक्षिण का नेतृत्व –

भारत अफ्रीका, दक्षिण-पूर्व एशिया और लैटिन अमेरिका के लिए सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील एआई समाधान विकसित कर सकता है।

निष्कर्ष –

भारत के पास एआई युग में अग्रणी बनने का अवसर है। लेकिन इसके लिए केवल स्टार्टअप्स बनाना पर्याप्त नहीं होगा। ओपन,  सुरक्षित और संप्रभु एआई पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना होगा।

यदि भारत तकनीकी प्रतिभा को वैश्विक पूंजी और मजबूत निष्पादन क्षमता से जोड़ सके, तो वह एआई उपभोक्ता नहीं बल्कि एआई निर्माता राष्ट्र बन सकता है।

द इकोनॉमिक टाइम्समें प्रकाशित संपादकीय पर आधारित। (17/06/26)