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प्रशासनिक सेवा में सुधार

Afeias
10 Sep 2020
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प्रशासनिक सेवा में सुधार

Date:10-09-20

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भारतीय प्रशासनिक सेवाओं में प्रतिवर्ष 180 लगभग प्रतिभावान युवाओं का चयन किया जाता है। चयन प्रशिक्षण और नियुक्ति के दौरान ये युवा प्रतिभावान , आदर्शवादी और ऊर्जावान होते हैं। परन्तु बढ़ती उम्र के साथ परिवार के दायित्व  को संभालते हुए ये अपने पथ से नीचे गिर जाते हैं। इन पर सत्ता की शक्ति का बहुत दबाव रहता है। साथ ही इनके आदर्शों को वास्तविकता के धरातल पर अक्सर चोट खानी पड़ती है। इसका परिणाम इनके भ्रष्ट होने या अच्छे विचारों की राह में रोड़े अटकाने के रुप में सामने आता है।

कुछ ऐसे रास्ते हैं , जिनके माध्यम से प्रशासकों को अपने संपूर्ण कार्यकाल में प्रतिस्पर्धी बनाए रखा जा सकता है।

  1. मानव पूंजी को बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन प्रदान करके इसे सुधार सकते हैं।
  1. इनके नीचे गिरते स्तर को बचाने के लिए एक आकर्षक निकाय मार्ग प्रदान करना।
  1. सेवा से बाहर के प्रतिभावान उम्मीदवारों से प्रतिस्पार्धा ।

इन तीनों बिन्दुओं पर काम करने के लिए प्रशिक्षुओं को सात वर्ष की प्रारंभिक नियुक्ति दी जानी चाहिए। छठे वर्ष में इनका मूल्यांकन करने के लिए तीन आकर्षक विकल्प दिए जा सकते हैं।

  1. सेवा में बने रहने के लिए वे किसी बाहरी प्रतिभावान उम्मीदवार से प्रतिस्पर्धा करें। इस तरीके से नियुक्ति को पार्श्व नियुक्ति ( लेटरल एंट्री) जैसा माना जा सकता है।
  1. अधिकारी को विश्व के किसी अच्छे संस्थान में आगे पढ़ाई के लिए स्कॉलरशिप दी जाए।
  1. एक करोड़ की प्रारंभिक पूँजी देकर उसको उद्यमिता के लिए प्रोत्साहन दिया जाए।

इन निकायों के अलावा भी अधिकारी निजी क्षेत्र में नौकरी जैसा कोई रास्ता् चुन सकते हैं। ऐसा मूल्यांकन हर सात वर्ष पर किया जाना चाहिए। उन्हें स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति का भी विकल्प दिया जा सकता है।

इस प्रकार के निकाय मार्ग या विकल्पों से बहुत से लाभ हो सकते हैं –

  • युवा अधिकारियों को अपना कार्यकाल संक्षिप्त किन्तु गतिशील और लाभप्रद लगेगा।
  • सरकारी सेवा में कौशल को आजमाने के बाद एक नया परिवर्तन उन्हें पुनर्जीवित कर देगा।
  • उनकी प्रतिभा को लेकर उन्हें पछतावा नहीं होगा कि वे गलत सेवा में फंस गए हैं।
  • जो अधिकारी सर्विस जारी रखेंगे , उन्हें बाहरी व्यक्तियों से प्रतिस्पर्धा करते हुए स्वयं की शक्ति , क्षमता व अनुभव पर भरोसा रहेगा। साथ ही वे अपडेटेड रहेंगे।
  • सरकार को भी सेवा के लिए उपयुक्त , चुस्त-दुरुस्त प्रशासकों का समूह मिलता रहेगा।
  • इन विकल्पों से ऐसे युवाओं को लाभ होगा, जो आजीवन इस सेवा से बंधे नहीं रहना चाहते , परन्तु प्रशासनिक क्षेत्र में भी अपनी प्रतिभा दिखाना चाहते हैं।

कार्पोरेट प्रशासन में भी सुस्त पड़ गए कर्मचारियों को आकर्षक पैकेज देकर बाहर का रास्ता दिखाया जाता है। इस क्षेत्र में यह कुछ हद तक सफल भी रहा है। ऐसा ही तरीका हम प्रशासनिक सेवाओं में भी अपना सकते हैं। इस मार्ग से शायद भ्रष्टाचार , अकर्मण्यता , धीमी कार्यशैली , लालफीताशाही जैसी कार्यपद्धति से देश को छुटकारा मिल सके।

‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ में प्रकाशित भगवान चौधरी और प्राची ड्योस्कर के लेख पर आधारित। 26 अगस्त, 2020

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