पुराने संबंधों से नया समूह बनाता भारत
To Download Click Here.

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने न्यूयॉर्क में विसेग्राद समूह (वी-4) व लैटिन अमेरिकी व कैरेबियन देशों के विदेश मंत्रियों के साथ चर्चा की जो काफी अहम रही।
विसेग्राद व भारत के पारस्परिक हित –
- यह स्लोवाकिया, पोलैंड, हंगरी और चेक गणराज्य का समूह है, जो पश्चिमी दुनिया और बड़ी वैश्विक ताकतों के मध्य एक नए राजनीतिक-कूटनीतिक प्रवेश द्वार के रूप में काम करता है।
- इकोनॉमिक ब्लॉक के रूप में यह यूरोप की पांचवीं और दुनिया की 12वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है।
- विसेग्राद के देशों ने सुरक्षा परिषद में भारत की सदस्यता का समर्थन किया, जिससे पता चलता है कि वे हमें हिंद-प्रशांत क्षेत्र की उभरती सुपर-पावर के रूप में स्वीकार करते हैं।
- इस बैठक में व्यापार और निवेश, तकनीक और नवाचार, आपूर्ति श्रृंखला, रक्षा सुरक्षा, कनेक्टिविटी, शिक्षा तथा लोगों के आपसी संपर्क जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर बात हुई।
- हम ग्लोबल साउथ में नेतृत्व की भूमिका में हैं। इसलिए G-4 भारत की संकल्पना यूरोपीय देशों को आर्थिक और अकादमिक क्षेत्रों में लाभ पहुँचा सकते है। दोनों पक्ष राजनीतिक, आर्थिक, तकनीकी व रक्षा क्षेत्र में सहयोग पर सहमत हुए हैं।
- भारत व यूरोप के मध्य एफटीए हो चुका है। रक्षा, उन्नत तकनीक, नवाचार, कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में भी V-4 के साथ रिश्ता जैसे-जैसे आगे बढ़ेगा, संस्थागत सहयोग मजबूत होगा।
सीआईएलएसी व भारत के पारस्परिक हित –
- सीआईएलएसी लैटिन अमेरिकी व कैरेबियाई के 33 देशों का समूह है, जिसमें दुनिया की 60-65 करोड़ आबादी बसती है। यह ग्लोबल साउथ का भी अहम हिस्सा है। इसी कारण वर्ष 2025-26 में भारत सीआईएलएसी द्विपक्षीय व्यापार 50 अरब डॉलर की सीमा पार कर सका, जो एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।
- हमारे फार्मास्यूटिकल्स व दक्ष मानव संसाधन, तकनीकी, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर व विशाल उपभोक्ता बाजार सीआईएलएसी के लिए लाभकारी होगा।
- महत्वपूर्ण खनिज, सतत ऊर्जा और कृषि उत्पादों के रूप में हम सीआईएलएसी से लाभान्वित होंगे। व्यापार, निवेश व व्यावसायिक साझेदारियों में हमारे मजबूत कारोबारी संबंध बन सकते हैं और बाजार तक अधिक पहुँच सुनिश्चित हो सकेगी।
- हमें इन देशों के साथ एक ऐसी मूल्य श्रृंखला बनानी होगी, जिसमें मैन्युफैक्चरिंग, डिजिटल सेवाएँ, तकनीक, अक्षय ऊर्जा, लॉजिस्टिक और उनके आधुनिक ढाँचे शामिल हों। इसलिए हमने चिली के साथ व्यापक आर्थिक साझेदारी और पेरू के साथ मुक्त व्यापार समझौते और मर्कोसुर के साथ तरजीही व्यापार समझौते की कवायद की जा रही है।
- ग्लोबल साउथ का एक हिस्सा एशिया व अफ्रीका के देश भी हैं। पर इससे सीआईएलएसी का महत्व कम नहीं हो जाता। हम ग्लोबल साउथ के रूप में एक बड़े देश का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसलिए सुरक्षा परिषद में हमारी सदस्यता की मांग को टालना विकसित देशों के लिए आसान नहीं होगा।
- हम लोकतांत्रिक मूल्यों व दक्षिण-दक्षिण सहयोग में एक जैसी प्रतिबद्धता रखते हैं।
यद्यपि निवेश के क्षेत्र में चीन से प्रतिस्पर्धा एक चुनौती है, लेकिन नई दिल्ली की कूटनीतिक सक्रियता इसका हल निकाल सकती है।