बीमा में कमीशन नहीं, कवरेज बढ़े

Afeias
15 Oct 2026
A+ A-

To Download Click Here.

हाल ही में इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ने बीमा क्षेत्र में कमीशन की सीमा तय करने का प्रस्ताव रखा है।

कुछ बिंदु –

  • बीमा का उद्देश्य लोगों को आर्थिक सुरक्षा देना है, लेकिन बीमा बेचने में होने वाला बहुत अधिक खर्च इस उद्देश्य को कमजोर कर सकता है। आईआरडीएआई कमीशन पर सीमा लगाने का प्रस्ताव इसलिए ला रहा है, ताकि बीमा कंपनियाँ अधिक पैसा कमीशन देने के बजाय वास्तविक बीमा कवरेज बढ़ाने में लगें।
  • भारत में बीमा की पहुँच अभी भी अपेक्षाकृत कम है। इसलिए बीमा क्षेत्र को अर्थव्यवस्था की वृद्धि से कहीं तेज गति से बढ़ाने की जरूरत है। इसके लिए बीमा उत्पादों की लागत कम और व्यवस्था अधिक पारदर्शी होना जरूरी है।
  • एक बड़ी समस्या मिस-सेलिंग की है। कई बार एजेंट या वितरक अधिक कमीशन पाने के लिए ग्राहक को उसकी जरूरत से अलग उत्पाद बेच सकते हैं। अलग-अलग वित्तीय उत्पादों के साथ बीमा की बिक्री होने से कमीशन और प्रोत्साहन की व्यवस्था भी जटिल हो जाती है। इसलिए पारदर्शिता बढ़ाने और संबंधित पक्षों के लेन-देन की निगरानी पर जोर दिया जा रहा है।

चुनौतियां-

  • कमीशन सीमा से बीमा कंपनियों, एजेंटों और फिनटेक कंपनियों के कारोबार पर अल्पकाल में दबाव पड़ सकता है।
  • अलग-अलग बीमा उत्पादों के वितरण मॉडल भी अलग होते हैं, इसलिए नियमों का प्रभाव सभी पर समान नहीं होगा।
  • अल्पकाल में बाजार में अस्थिरता आ सकती है।

आईआरडीएआई को ग्राहक हित, उद्योग की व्यावहारिक जरूरत और बीमा की व्यापक पहुँच; इन तीनों के बीच संतुलन बनाना होगा। बीमा क्षेत्र का लक्ष्य केवल अधिक पॉलिसी बेचना नहीं, बल्कि लोगों को सही और पर्याप्त वित्तीय सुरक्षा देना होना चाहिए। कमीशन में सुधार इस दिशा में एक कदम हो सकता है, बशर्ते कि नियम पारदर्शी और संतुलित हों।

‘द इकोनॉमिक टाइम्स’ में प्रकाशित संपादकीय पर आधारित। 28/09/26